Adityapur Mayor post reservation: आदित्यपुर मेयर सीट: क्या 17 दिसंबर के बाद बदल जाएगा आरक्षण? हाईकोर्ट में सरकार को देना है जवाब झारखंड निकाय चुनाव: मेयर पद आरक्षण पर संशय बरकरार
झारखंड में आगामी नगर निगम चुनाव को लेकर मेयर पद के आरक्षण पर एक बार फिर संशय के बादल छा गए हैं। नगर विकास विभाग द्वारा मेयर पद के आरक्षण को दो वर्गों (‘क’ और ‘ख’) में बांटे जाने के मामले को लेकर राज्य में चुनाव की तारीखें आगे खिसक सकती हैं।
दरअसल, नगर विकास विभाग ने मेयर पद का आरक्षण आबादी के आधार पर दो वर्गों में विभाजित कर दिया है। वर्ग ‘क’ में 10 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगमों को रखा गया है, जबकि वर्ग ‘ख’ में 10 लाख से कम आबादी वाले निगम शामिल हैं। इस वर्गीकरण के तहत, रांची और धनबाद को 10 लाख से अधिक आबादी वाले वर्ग में रखा गया है। धनबाद को सामान्य घोषित किया गया है, जबकि पुरानी अधिसूचना के तहत यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित थी। वहीं, गिरिडीह को SC वर्ग में आरक्षित किया गया है।
नगर विकास विभाग के इस नए फॉर्मूले के खिलाफ धनबाद के निवासी शांतनु चंद्रा ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। चंद्रा का दावा है कि वह पिछले एक साल से सक्रिय होकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे जब धनबाद सीट SC के लिए आरक्षित थी। उन्होंने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि झारखंड सरकार ने वर्ष 2022 में आबादी के आधार चुनावों में आरक्षण दिए जाने संबंधित एक विधेयक पारित किया था। इस हिसाब से, रांची मेयर पद जो अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित है, वह तो सही है, लेकिन अन्य नगर निगमों में वर्ष 2011 की जनसंख्या को आधार मानकर आरक्षण का फॉर्मूला तय किया गया है। यह 2011 की जनसंख्या वर्तमान, यानी 2025 की आबादी काफी अधिक है।
शांतनु चंद्रा ने यह भी बताया कि 2022 के विधेयक में सरकार ने प्रबंधन के दृष्टिकोण से नगर निकायों को दो वर्गों में बांटने की आवश्यकता बताई थी, लेकिन जहां आबादी सर्वाधिक है, वहां आरक्षण दिए जाने का यह फॉर्मूला तर्कसंगत नहीं बैठता। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि 10 लाख से अधिक और कम आबादी वाले दो वर्गों में नगर निगमों को बांटे जाने का कोई विधेयक पारित नहीं हुआ है। इसे केवल कैबिनेट से पास कराया गया है, जिस पर अभी राज्यपाल की मुहर नहीं लगी है।
हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड सरकार को 17 दिसंबर तक इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता शांतनु चंद्रा का मानना है कि अगर जनसंख्या को आधार मानते हुए आरक्षण का फॉर्मूला तय किया जाता है, तो रांची को छोड़कर अन्य आठ नगर निगमों में आरक्षण बदल सकता है।
अगर ऐसा होता है, तो सबसे बड़ी संभावना यह है कि आदित्यपुर नगर निगम चुनाव में मेयर का पद दोबारा सामान्य घोषित हो सकता है। 17 दिसंबर को सरकार के जवाब और हाईकोर्ट के रुख पर ही झारखंड नगर निकाय चुनाव की आगे की दिशा तय होगी। अगर आरक्षण में बदलाव होता है, तो चुनाव की तारीखों का आगे बढ़ना लगभग तय है, जिससे राज्य में चुनावी प्रक्रिया पर एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल बन जाएगा।