Chaibasa (चाईबासा) : झारखंड-ओडिशा सीमा पर स्थित बनीसागर क्षेत्र में एक बिछड़े हुए जंगली हाथी का आतंक अब जानलेवा स्तर पर पहुँच गया है। शुक्रवार को तीन लोगों को बेरहमी से कुचलने के बाद, यह ‘खूनी हाथी’ एक बार फिर झारखंड की सीमा में दाखिल हो गया है। वन विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद हाथी को अब तक नियंत्रित नहीं किया जा सका है।
झारखंड-ओडिशा सीमा पर ‘पुश-बैक’ की स्थिति
कल देर शाम चाईबासा वन विभाग ने घंटों की मशक्कत के बाद हाथी को ओडिशा के जंगलों की ओर खदेड़ा था। लेकिन पहले से ही मुस्तैद ओडिशा के वन कर्मियों ने सुरक्षा कारणों से हाथी को वापस झारखंड की ओर खदेड़ दिया। देर रात हाथी ने पुनः चाईबासा सीमा में प्रवेश किया, जिसके बाद से वन विभाग की टीमें ‘सर्च ऑपरेशन’ में जुटी हैं।

वनतारा रेस्क्यू टीम भी रही असफल, विशेषज्ञ ने गंवाई जान
हाथी को काबू करने के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और गुजरात से आई ‘वनतारा रेस्क्यू टीम’ ने आधुनिक संसाधनों के साथ मोर्चा संभाला। हालांकि, हाथी की आक्रामकता के आगे विशेषज्ञ भी बेबस नजर आए:
- तीन बार फायरिंग विफल: वन विभाग ने हाथी को बेहोश करने के लिए तीन बार ट्रेंकुलाइज गन का इस्तेमाल किया, लेकिन तीनों ही प्रयास असफल रहे।
- विशेषज्ञ की मौत: बचाव अभियान के दौरान हाथी ने हाथियों को भगाने के एक विशेषज्ञ पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
10 दिनों में 21 मौतें: दहशत में ग्रामीण
यह हाथी 1 जनवरी से अब तक कुल 22 लोगों की जान ले चुका है। वन अधिकारियों के मुताबिक, झुंड से बिछड़ने के कारण यह हाथी अत्यंत हिंसक हो गया है। इसकी रफ्तार भी चिंता का विषय है; यह प्रतिदिन लगभग 30 किलोमीटर की दूरी तय कर रहा है, जिससे इसकी सटीक लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है।
डीएफओ का बयान और प्रशासनिक अलर्ट
चाईबासा डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया:
”हाथी के दोबारा झारखंड में प्रवेश की पुष्टि हो चुकी है। हमारी टीम पूरी तरह अलर्ट पर है और उसे ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने का प्रयास फिर से शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे जंगलों की ओर न जाएं और सतर्क रहें।”
