खरसावां (झारखंड): पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने गुरुवार को खरसावां शहीद स्थल पहुंचकर वर्ष 1948 के ऐतिहासिक गोलीकांड में शहीद हुए वीर आदिवासियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उनके नेतृत्व में खिलारी साईं से शहीद स्थल तक एक विशाल रैली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग शामिल हुए।
रैली खरसावां के मुख्य बाजार क्षेत्र से होते हुए शहीद स्थल पहुंची, जहां उपस्थित जनसमूह ने शहीदों को नमन कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरा वातावरण “शहीदों अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।
“आज़ादी के जश्न के बीच आदिवासी अपने अधिकारों के लिए शहीद हुए” – अर्जुन मुंडा
मीडिया को संबोधित करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि देश की आज़ादी के महज एक वर्ष के भीतर खरसावां में हुआ यह नरसंहार भारतीय इतिहास का सबसे पीड़ादायक अध्याय है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि जब पूरा देश आज़ादी का उत्सव मना रहा था, उसी समय खरसावां में आदिवासी समाज अपने अस्तित्व, जल-जंगल-जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए गोलियों का शिकार बन रहा था।
विकास के मौजूदा मॉडल पर उठाए सवाल
अर्जुन मुंडा ने कहा कि आदिवासी जीवन की नींव जल, जंगल और जमीन हैं और इनकी उपेक्षा कर किया गया विकास कभी भी टिकाऊ या न्यायसंगत नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि आज़ादी के बाद पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारें आदिवासी परंपराओं और स्वशासन व्यवस्था को संविधान के तहत मजबूती देने में विफल रहीं, जिसके कारण पेसा कानून और ग्राम सभाएं कमजोर होती चली गईं।
जनसांख्यिकी परिवर्तन और अनियंत्रित निर्माण पर चिंता
उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अनुसूचित क्षेत्रों में बदलती जनसांख्यिकी, अनियंत्रित निर्माण और संसाधनों के दोहन पर गंभीर चिंता जताई। मुंडा ने कहा कि खरसावां के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकती है जब सरकार आदिवासी समाज के सांस्कृतिक मूल्यों, प्राकृतिक संसाधनों और संवैधानिक अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करे।


