Action against inter caste marriage: अंतरजातीय विवाह पर आदिवासी हो समाज महासभा हुआ सख्त, कहा – अंतरजातीय विवाह हो परंपरा के है विरुद्ध

Chaibasa : आदिवासी हो समाज महासभा ने हो समाज में हो रहे अंतरजातीय विवाह के खिलाफ एक्शन लिया है. अर्जुन मुंदुइया की अगुवाई वाली इस महासभा के महासचिव यदुनाथ तियू ने हो समाज के दो व्यक्तियों को नोटिस भेजा है. जिन्होंने अपनी बेटियों का विवाह अपने जाति-धर्म में न कर दूसरी जाति-धर्म में तय किया है. हालांकि नोटिस के बाद भी अंतरजातीय विवाह संपन्न हो गया जिसमें महासभा की ओर से किसी ने भाग नहीं लिया.

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अदिवासी हो समाज महासभा ने सबसे पहले सदर प्रखंड के करलाजुड़ी गांव निवासी सुखलाल पुरती एवं उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी सिंकू को नोटिस भेजा था. नोटिस के मुताबिक इन दोनों ने अपनी बेटी की सामाजिक शादी मुंडा समाज के ईसाई धर्मावलंबी लड़के से तय किया था. यह शादी 12 फरवरी 2023 को होनी थी और हो भी गयी. इसी तरह महासभा ने दूसरी नोटिस कमल हाईबुरू एवं पत्नी सुषमा हाईबुरू को भेजा था. नोटिस के मुताबिक इन दोनों ने भी अपनी बेटी का सामाजिक विवाह अपने जाति-धर्म से अलग दूसरे जाति-धर्म के लड़के से तय किया था. नोटिस के मुताबिक यह लड़का भी मुंडा जाति तथा ईसाई धर्म से आता था. इनकी शादी 14 फरवरी 2023 को होनी थी और नोटिस के बाद भी हो गयी. सुखलाल पुरती तथा कमल हाईबुरू फिलहाल संत जेवियर्स इंगलिश स्कूल के पास सरनाडीह में खुदका घर बनाकर रहते हैं.

यह विवाह हो परंपरा तथा रिवाजों के खिलाफ है : महासभा

आदिवासी हो समाज महासभा ने इन दोनों को भेजे नोटिस में कहा है कि यह अंतरजातीय विवाह हमारे हो समाज की परंपरा तथा रीति-रिवाजों के विरुद्ध है. इस पर महासभा को आपत्ति है. हालांकि वर-वधू बालिग है, इसलिये वे विवाह को स्वतंत्र है. लेकिन इस शादी में हो समाज के लोगों को आमंत्रित कर शादी को सामाजिक मान्यता दिलाने का प्रयास अस्वीकार्य है. नोटिस में महासभा ने दोनों को इस अंतरजातीय विवाह के संबंध में सुधारात्मक कार्यवाही का आदेश दिया था. लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ. नतीजा, सुखलाल पुरती तथा कमल हाईबुरू बेटियों की अंतरजातीय विवाह के फैसले पर अडिग रहे.

नोटिस में महासभा ने ये भी कहा है कि हो समाज में आप जैसे पढ़े-लिखे तथा संपन्न लोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति के लिये अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने में ईंधन का काम कर रहे हैं. महासभा इसकी घोर निंदा करती है. कहते हैं कि दोनों ने नोटिस का जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझा. महासभा के अनुसार सुखलाल पुरती लंबे समय से महासभा के सेवानिवृत्त संगठन से जुड़े हुए थे. सुखलाल पुरती तथा कमल हाईबुरू दोनों सरकारी नौकरी में थे.

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