कुड़मी समाज आंदोलन से रेलवे को 1700 करोड़ का हुआ नुकसान, 4.32 लाख यात्री रहे परेशान

Jamshedpur:-  कुड़मी समाज ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने, कुरमाली भाषा को मान्यता देने और सरना धर्म कोड अविलंब चालू करने की मांग को लेकर चल रहे अपने रेल रोको आंदोलन को रविवार को वापस ले लिया.

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ट्रेनों का परिचालन हुआ शुरू
ट्रेनों का परिचालन हुआ शुरू

दक्षिण पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी आदित्य कुमार चौधरी ने बताया कि सुबह 11.45 बजे आद्रा मंडल के कुस्तौर स्टेशन से प्रदर्शनकारियों के हटने का सिलसिला शुरू हुआ. शाम को खड़गपुर मंडल के खेमाशुली और आद्रा मंडल के कोटशिला स्टेशन से भी प्रदर्शनकारी हट गये. अब ट्रेनों को धीरे-धीरे परिचालन में लाया जायेगा. सैकड़ों की संख्या में मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें फंसी हुई हैं. जिसे अब अपने समय पर परिचालन करने का प्रयास किया जायेगा. हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में एक से दो दिन का समय लग सकता है.

पिछले पांच अप्रैल से प्रदर्शनकारी कुस्तौर और खेमाशुली स्टेशनों पर धरना दे रहे थे. प्रदर्शनकारियों ने कुस्तौर मोड़ के पास सड़क मार्ग को भी बंद कर दिया था. सड़क मार्ग के अवरोध को भी हटा लिया गया है. रविवार दिन में प्रदर्शनकारी नये सिरे से कोटशिला स्टेशन पर धरने पर बैठ गये थे. देर रात यहां से भी प्रदर्शनकारी हट गये.

उधर, लगातार पांच दिन चले कुड़मी समाज के प्रदर्शन के चलते रेलवे को 435 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा. एक आकलन के अनुसार, लगभग 4,32,000 यात्रियों को अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी. पांच अप्रैल से खड़गपुर मंडल और आद्रा मंडल में ट्रेन सेवा प्रभावित होने से रेलवे को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार,दक्षिण पूर्व रेलवे को 1700 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा है. इसमें सबसे ज्यादा नुकसान खड़गपुर मंडल को हुआ है. रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि हर दिन हजारों की संख्या में रेल आरक्षण टिकटों को रद्द किया गया. विभिन्न स्टेशनों के टिकट काउंटरों पर भारी संख्या में यात्री अपने टिकटों को रद्द कराने पहुंचे.

हावड़ा स्टेशन पर टिकट रद्द करने पहुंचे यात्री राज शेखरन ने बताया कि पांच दिनों से ट्रेनों के रद्द होने से लोग यात्रा नहीं कर पा रहे थे, लेकिन ट्रेन परिचालन शुरू होते ही ट्रेनों में भारी भीड़ होगी. अन्य स्टेशनों पर फंसे लोग ट्रेनों के खुलने का इंतजार कर रहे हैं. हर कोई किसी भी तरह से अपने गंतव्य स्टेशन पहुंचना चाहता है. ऐसे में रेलवे को स्पेशल ट्रेनों का परिचालन करना चाहिए.

उधर, आदिवासी कुड़मी समाज के मुखिया अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि राज्य प्रशासन के साथ लगातार बैठकें हुईं. बैठक सफल नहीं होने के कारण प्रशासन ने हमें पत्र दिया. जिसमें 10 अप्रैल को मुख्य सचिव से बैठक कर मांगों के बारे में जानकारी प्रदान करने को कहा गया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कई बार आश्वासन दिया, लेकिन उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं. इसे लेकर पत्र को वापस लौटा दिया गया. प्रस्ताव को मानने से इनकार किया गया.उन्होंने कहा कि प्रशासन के अनुरोध पर नहीं, संगठन ने खुद से कुस्तौर स्टेशन तथा मोड़ पर आंदोलन खत्म कर दिया है.

उधर, खेमाशुली में भी कुड़मी समाज ने रेल रोको आंदोलन खत्म कर दिया है. रविवार रात करीब 8.12 बजे आंदोलनकारियों ने रेलवे ट्रैक पर लगे झंडे को हटा लिया, जिसके बाद एक मालगाड़ी खेमाशुली से टाटानगर की ओर रवाना हो गयी. खड़गपुर डिविजन के सीनियर डीसीएम राजेश कुमार ने बताया कि खेमाशुली में कुड़मी समाज ने आंदोलन वापस ले लिया है. जल्द ही खड़गपुर-टाटानगर रेल सेवा सामान्य हो जायेगी. दूसरी ओर खेमाशुली में रेल सेवा स्वाभाविक होने के बावजूद खड़गपुर-जमशेदपुर मुख्य सड़क जाम है.

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