चाईबासा के दो पत्रकारों के खिलाफ दर्ज करवाया गया झूठा मामला, क्रिकेट मैच के बहाने बदनाम करने एवं समाज में पत्रकारों की छवि को धूमिल करने की साजिश

●क्रिकेट मैच के बहाने बदनाम करने एवं समाज में पत्रकारों की छवि को धूमिल करने की साजिश

●अवैध लॉटरी संचालकों और विरोधी संगठन की है चाल

Chaibasa : – चाईबासा के सदर थाना में 31 मई को मारपीट कर किसी औजार से घायल कर चेन छीनने का झूठा और बेबुनियाद तथ्यों के साथ चाईबासा के दो पत्रकारों जबरन मामला दर्ज करवाया गया. इतना ही नही मामला दर्ज करवा कर बदनाम करने की बड़ी साजिश रची गई है. उक्त बातें पत्रकार देवेंद्र सिंह और सुजीत साहू ने अपना पक्ष रखते हुए कही है.

देवेंद्र सिंह ने बताया कि वे 24 मई 2023 से 3 जून तक चाईबासा में ही नही थे. जब वे चाईबासा में नही थे तो किसी भी घटना को कैसे अंजाम दे सकते हैं. थाने में दर्ज मामले में दिए गए समय और तारीख के अनुसार देवेंद्र सिंह जमशेदपुर बाजार में खरीदारी कर रहे थे. खरीदारी से संबंधित एटीएम, फोन पे और क्रेडिट कार्ड आदि का इस्तेमाल किया गया. जिसमें का पूरा सबूत पुलिस के समक्ष रखा गया है, अन्य प्रमाण भी जुटाया गया है.

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उन्होंने कहा कि इस झूठे आरोप लगने के बाद दोनों पत्रकारों ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर के समक्ष सारी बातें रखी गई हैं. पुलिस अधीक्षक ने आश्वस्त करते हुए कहा है कि मामले की पूरी जांच की जाएगी.

इधर, सुजीत साहू ने बताया कि वे झारखंड के सुचना एवं जनसंपर्क विभाग से मान्यता प्राप्त एक पत्रकार हूँ एवं पिछले 19 वर्षों के कार्यकाल के दौरान कई संस्थानों मे पत्रकारिता के क्षेत्र योगदान दे चूका है. उनके द्वारा किसी के ऊपर घातक हमला करना करना तो दूर की बात, उन्होंने आज तक किसी के ऊपर हाथ भी नहीं उठाया है. इसके बावजूद भी एक षड्यंत्र के तहत इस मामले आरोपी बनाया गया. जिसके चलते मैं काफी आहत हैं. इस पुरे घटना क्रम की बात करें तो पत्रकार साथी देवेंद्र सिंह चाईबासा में नहीं थे. फिर भी उन्हें मामले में आरोपी बनाया गया. पिछले एक मई को पत्रकार संगठन के द्वारा क्रिकेट मैच का सफल आयोजन हुआ. यह बात प्रतिद्वंद्वी संगठन को हजम नहीं हो रही है. उन्हें अपनी दुकानदारी बंद होने का डर संताने लगा है.यही कारण है कि क्रिकेट मैच के बहाने बदनाम करने एवं समाज में हमारे छवि को धूमिल करने की नियत से षड्यंत्र रचा गया.

दूसरी ओर लंबे समय से हत्या एवं अन्य आपराधिक मामले के आरोपी के द्वारा लंबे समय से प्रतिबंधित लॉटरी का कारोबार चाईबासा में संचालित कर जिले के आदिवासी मुलवासीयों से उनकी गाढ़ी कमाई लूटी जा रही है. जिसके खिलाफ खबर प्रकाशित किया गया था. फिलहाल वो जामनत पर बाहर निकला है, और लॉटरी कारोबार के सहारे प्रतिदिन 10 से 15 लाख रु की अवैध कमाई करने मे जुटा हुआ है. उनके खिलाफ पिछले वर्ष चक्रधरपुर थाना मे कांड संख्या 88/2022 दर्ज हुआ.

सुजीत साहू ने कहा कि घटना क्रम के दिन की बात है. मैं चाईबासा बस स्टैंड अपने एक पार्सल को भुवनेश्वर भेजने के लिए गया था. जिसके पुख्ता प्रमाण मेरे पास है, कांड का शिकायकर्ता अभिषेक कमार दीक्षित ऊर्फ राजा चक्रधरपुर थाने मे दर्ज लॉटरी कांड 88/2022 का आरोपी है, फिलहाल जामनत पर जेल से बाहर रहकर अपने काले कारनामो को अंजाम दे रहा है. जबकी आशीष यादव उर्फ गोलू मुख्य लॉटरी संचालक का चचेरा भाई है. इन दोनों का नाम भी प्रतिबंधित लॉटरी संचालित करने की बात सामने आई थी. जिसे लेकर इन दोनों नाम खबर में प्रकाशित कर चूका हूँ. यहीं कारण है अवैध लॉटरी से फायदा उठाने वालों की नजरों मैं किरकिरी बन गया था. यही कारण है कि बस स्टैंड में देखने के बाद एक सुनियोजित साजिश के तहत मुझे फंसाने का प्रयास किया गया. लिहाजा अभिषेक कुमार दीक्षित के द्वारा 20000 रुपये रंगदारी मांगने का आरोप लगाना पूरी तरह से बेबुनियाद है.

पूर्व के दिनों में भी अवैध लॉटरी माफिया के द्वारा जान से मारने की धमकी दी गई थी जिसे लेकर सदर थाना में सनाह दर्ज करवाई गई थी. घटना से संबंधित पूरी जानकारी जिले के पुलिस अधीक्षक को दी गई है.

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