चांडिल (सरायकेला-खरसावां) : कपाली ओपी क्षेत्र अंतर्गत गौरी घाट में लंबे समय से जारी अवैध बालू उत्खनन और ढुलाई के खिलाफ शुक्रवार को स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण घाट पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करते हुए बालू माफियाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी वैध टेंडर और प्रशासनिक अनुमति के दिन-रात बालू उठाव किया जा रहा है, जिससे नदी के पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही इससे गांव की सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं भी प्रभावित हो रही हैं।
श्मशान घाट को बनाया गया बालू डंपिंग यार्ड
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि श्मशान घाट में बालू का अवैध डंपिंग किया जा रहा है। इसके चलते अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बाधित हो रही है और ग्रामीणों को मजबूरी में अन्य स्थानों पर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है, जो उनकी धार्मिक आस्था और मानवीय गरिमा के साथ खिलवाड़ है।
सिंडिकेट की मुनाफाखोरी, सरकार को राजस्व नुकसान
स्थानीय लोगों का कहना है कि बालू माफिया और सिंडिकेट इस अवैध कारोबार से भारी मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि बिना टेंडर और निगरानी के यह अवैध उत्खनन आखिर कब तक जारी रहेगा।
प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
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गौरी घाट में अवैध बालू उठाव तत्काल बंद कराया जाए
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श्मशान घाट से बालू डंपिंग तुरंत हटाई जाए
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दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए








