आदिवासी हो समाज महासभा अधिवेशन 2026: परंपरा संरक्षण पर ऐतिहासिक निर्णय

आदिवासी हो समाज महासभा अधिवेशन 2026

Chaibasa : आदिवासी हो समाज महासभा अधिवेशन 2026 का दो दिवसीय वार्षिक आयोजन आदिवासी कल्याण केंद्र किरीबुरु में रविवार को विधिवत रूप से आरंभ हुआ। अधिवेशन की शुरुआत दियूरी धनुर्जय लागुरी द्वारा बोंगा बुरु के पूजन के साथ की गई। इसके बाद महासभा का ध्वजारोहण किया गया और सामूहिक प्रार्थना (गोवारी) के साथ कार्यक्रम आगे बढ़ा।

आदिवासी हो समाज महासभा की बैठक सम्पन्न उपरूम जुमुर कार्यक्रम व वार्षिक अधिवेशन को लेकर लिए गए अहम निर्णय

अधिवेशन का शुभारंभ और प्रतिनिधि सभा 

कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत आदिवासी कल्याण केंद्र के अध्यक्ष हीरालाल सुंडी, करमपदा मुंडा और राजेश मुंडा ने संयुक्त रूप से की।
आदिवासी हो समाज महासभा अधिवेशन 2026 में प्रतिनिधि सभा के सदस्यों के बीच सामाजिक मुद्दों पर गहन चर्चा-परिचर्चा शुरू हुई।

आदिवासी हो समाज महासभा अधिवेशन 2026

भाग कर शादी की परंपरा पर निर्णय

अधिवेशन में “केया-केपेया आंदी” (भाग कर शादी) की सामाजिक प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में बाला की प्रक्रिया में हो रही गलत परंपराएं समाज के मूल दस्तूर के विपरीत हैं।

महत्वपूर्ण निर्णय

  • लड़की के घर बाला में लड़का नहीं जाएगा

  • लड़के के घर बाला में लड़की नहीं जाएगी

  • बाला के दौरान शादी करना हो समाज की परंपरा के विरुद्ध है

प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से बाला में शादी की प्रक्रिया को अमान्य घोषित किया।

भाग कर शादी मान्य, लेकिन शर्तों के साथ

निर्णय लिया गया कि भाग कर शादी की प्रथा मान्य रहेगी, लेकिन इसके लिए घर के आंगन में

  • ससंग-सुनुम

  • आदिंग-हेबे आदेर

की प्रक्रिया पूरी करनी अनिवार्य होगी। इसके बाद अजिहनर के रूप में लड़की पक्ष के आने पर बाला संपन्न होगा।

मारंग बोंगा संस्कृति के संरक्षण पर जोर

आदिवासी हो समाज महासभा अधिवेशन 2026 में मारंग बोंगा संस्कृति को पुनर्जीवित करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रत्येक किली (गोत्र) का अपना मारंग बोंगा और प्रवास इतिहास होता है, जिसे हो समाज में अत्यंत सम्मान प्राप्त है।

कई गोत्रों में यह परंपरा विलुप्त होने की कगार पर है, जिसे लेकर महासभा ने चिंता व्यक्त की।

बिरुवा किली का मारंग बोंगा इतिहास 

महासभा अध्यक्ष मुकेश बिरुवा ने बिरुवा किली के मारंग बोंगा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बिरुवा किली के लोग वर्तमान में लगभग 84 गांवों में निवास करते हैं और उनका प्रवास इतिहास गेरू नगर व चोंपा नगर से प्रारंभ होकर कई क्षेत्रों तक फैला हुआ है।

इस वर्ष केवल बिरुवा किली का मारंग बोंगा महासभा के पास जमा किया गया।

अंतर्जातीय विवाह और रिंग सेरेमनी पर फैसला (H2)

अधिवेशन में यह भी तय किया गया कि:

  • अंतर्जातीय विवाह को हो समाज में मान्यता नहीं मिलेगी

  • ऐसे विवाह किसी भी पारंपरिक पूजा-पाठ में शामिल नहीं होंगे

  • रिंग सेरेमनी हो समाज की पारंपरिक विवाह प्रणाली का हिस्सा नहीं है

समाज के लोगों से ऐसे आयोजनों से बचने की अपील की गई।

कौन-कौन रहे उपस्थित

सभा में सोमा कोड़ा, चैतन्य कुंकल, बामिया बारी, छोटेलाल तामसोय, माधव चन्द्र कोड़ा, रोया राम चंपिया, गोपी लागुरी, रमेश लागुरी, बलभद्र बिरुली, श्याम बिरुवा, अमर बिरुवा, नीलिमा पुरती, गीता लागुरी सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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