चाईबासा (Chaibasa): Mage Parab Chaibasa के अंतर्गत जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम साननंदा में शुक्रवार को पारंपरिक आदिवासी मागे पर्व बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। यह पर्व आदिवासी हो समाज की सांस्कृतिक पहचान का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। पूरे गांव में सुबह से ही पर्व को लेकर उत्सवी माहौल बना रहा।
इस विशेष अवसर पर जगन्नाथपुर के विधायक सह उप मुख्य सचेतक (सत्तारूढ़ दल) सोनाराम सिंकु अपने परिवार के साथ शामिल हुए। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी तुलसी सिंकु, पुत्र जगप्रीत सिंकु तथा पुत्रियां ईशा सिंकु और निशा सिंकु भी मौजूद रहीं। विधायक परिवार के आगमन से ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखा गया।
Mage Parab Chaibasa में जहेरा स्थल पर पारंपरिक पूजा
मागे पर्व के अवसर पर विधायक परिवार गांव स्थित जहेरा स्थल पहुंचे, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई।
देऊरी द्वारा विधिवत अनुष्ठान
मुख्य देऊरी सारीम लागुरी एवं सहायक देऊरी मनोज बोबोंगा ने मरांग पर्व के दिन गांव की सुख-समृद्धि, शांति और मंगलकामना के लिए पूजा कराई। इस अनुष्ठान में हजारों ग्रामीण श्रद्धा के साथ शामिल हुए।
आदिवासी हो समाज का सबसे बड़ा पर्व
Mage Parab Chaibasa केवल एक त्योहार नहीं बल्कि सामाजिक एकता और प्रकृति पूजा का महापर्व है। यह पर्व कई चरणों में मनाया जाता है, जिनमें प्रमुख हैं:
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गऊमाराह
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ओतेएली
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गोरी पर्व
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मरांग पर्व
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बासी पर्व
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हारमागेया पर्व
इन सभी अनुष्ठानों का संबंध कृषि, प्रकृति, पूर्वजों और ग्राम देवताओं से होता है।
मांडर की धुन पर थिरका साननंदा गांव
पूजा-अर्चना के बाद गांव में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पारंपरिक नृत्य और गीत
मांडर की गूंजती धुन पर ग्रामीणों ने सामूहिक पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सभी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे गांव में उल्लास और भाईचारे का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
विधायक सोनाराम सिंकु ने दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम के दौरान विधायक सोनाराम सिंकु ने ग्रामीणों को Mage Parab Chaibasa की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र के विकास व जनकल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ग्रामीणों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
सामाजिक एकता का प्रतीक बना Mage Parab Chaibasa
इस वर्ष साननंदा गांव में मागे पर्व हर्षोल्लास, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मनाया गया। पर्व ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य किया।








