Chaibasa (चाईबासा): पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव, झींकपानी और टोंटों प्रखंड क्षेत्रों में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले एक महीने के भीतर हाथियों के हमले में 20 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, दर्जनों ग्रामीण बेघर हो चुके हैं। दहशत का आलम यह है कि ग्रामीण अब रातों की नींद त्याग कर मशालों के भरोसे पहरेदारी करने को मजबूर हैं।
चाईबासा हाथी मौत मामला: दर्दनाक भिड़ंत में हाथी की मौत, दांत गायब होने से सनसनी

सोनापोस में खिड़की तोड़कर निकाला अनाज
मंगलवार देर रात झुंड से बिछड़ा एक विशालकाय दंतैल हाथी सोनापोस पंचायत के बड़ाबेलम गांव में घुस आया। हाथी ने भानुमति चातार के घर पर हमला बोल दिया। उसने खिड़की तोड़कर घर के अंदर रखा लगभग एक क्विंटल धान और 25 किलो बिरई चट कर लिया। ग्रामीणों के शोर मचाने के बाद हाथी वहां से भागा, लेकिन जंगल जाने के बजाय पास के ही घोड़ाबंधा गांव के बाइपी टोला पहुंच गया।
बाइपी टोला में भारी तबाही
बाइपी टोला में हाथी ने और भी ज्यादा आक्रामक रूप दिखाया। यहां उसने एक के बाद एक तीन घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया:
- बसंती तिरिया: घर का सामान तहस-नहस कर करीब तीन क्विंटल धान खा गया।
- मोरा केराई और दामयंती केराई: इनके घरों से भी करीब चार से पांच क्विंटल धान व चावल हाथी ने नष्ट कर दिया।
ग्रामीणों की सूझबूझ ने बचाई जान
राहत की बात यह रही कि हाथी के गांव में घुसते ही ग्रामीणों ने शोर मचाकर सबको अलर्ट कर दिया था। सूचना मिलते ही प्रभावित परिवारों ने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर शरण ले ली थी, वरना एक बार फिर बड़ी जनहानि हो सकती थी।
प्रशासन से सुरक्षा की गुहार
हाथियों के लगातार रिहायशी इलाकों में आने से ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे हर रात मौत के साये में जी रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि:
- हाथियों को रिहायशी इलाकों से दूर खदेड़ने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
- प्रभावित परिवारों को अविलंब उचित मुआवजा और राशन दिया जाए।
- क्षेत्र में सोलर लाइट और सुरक्षा घेरे की व्यवस्था की जाए।







