चक्रधरपुर: चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम के तहत आदिवासी हो समाज नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम चैनपुर आदिवासी टोला एवं चंद्री लातरसाई गांव में आयोजित हुआ, जिसमें ग्रामीणों को सामाजिक एकरूपता, भाषा-संस्कृति संरक्षण और धार्मिक-सांस्कृतिक जुड़ाव के प्रति जागरूक किया गया।
इस पहल का नेतृत्व आदिवासी हो समाज युवा महासभा, नेशनल आदिवासी रिवाईवल एसोशिएसन एवं सिंगी एण्ड सिंगी सोसाईटी के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से किया।
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भाषा-संस्कृति संरक्षण पर विशेष जोर
सभा में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से है। यदि नई पीढ़ी इन मूल्यों से दूर होती गई तो सांस्कृतिक अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है।
ग्रामीणों को अपनी पारंपरिक:
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बोली-भाषा
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रीति-रिवाज
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पर्व-त्योहार
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सामुदायिक परंपराएँ
को संरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया गया।

सरकारी योजनाओं में भागीदारी की अपील
कार्यक्रम में आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। ग्रामीणों को बताया गया कि वे केवल लाभार्थी ही नहीं, बल्कि योजनाओं के सहभागी और निगरानीकर्ता भी बनें।
उन्हें ग्राम सभा और पंचायत कार्यकारिणी के माध्यम से:
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योजनाओं की निगरानी
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कार्य गुणवत्ता पर नियंत्रण
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पारदर्शिता सुनिश्चित करने
की अपील की गई।
सामाजिक सुधार पर वक्ताओं के विचार
आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने सामाजिक सुधार, एकता और विकास के मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा:
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विकास योजनाओं में ग्रामीण भागीदारी जरूरी
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बिचौलियों पर नियंत्रण आवश्यक
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पंचायत स्तर पर सामाजिक निगरानी बढ़े
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे स्वयं योजनाओं की अद्यतन जानकारी रखें और जवाबदेही तय करें।

बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे उपस्थित
इस अवसर पर कई सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें भीमसेन सुंडी, सुरेश पिंगुवा, रमेश बारला, रामलाल हेम्ब्रम, आसमान हेम्ब्रम, अभिराम बारला, कुंवरसिंह बारला, शिवा हेम्ब्रम, चरण बारला, पनमती बारला, प्रकाश गोप, विनाश हेम्ब्रम, रोशन हेम्ब्रम, राईमुनी बारला, पेलोंग बारला, मेचो बारला, राऊतु बारला, हरिश बारला, संतोष बारला एवं शकुंतला बारला सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।








