JAMSHEDPUR: युद्धवीर हवलदार घनश्याम प्रसाद सिंह (1971) को श्रद्धांजलि

हवलदार घनश्याम प्रसाद सिंह श्रद्धांजलि

JAMSHEDPUR: आज हम नमन करते हैं एक ऐसे वीर सपूत को, जिन्होंने 1971 के ऐतिहासिक भारत-पाक युद्ध में अपने अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति का अनुपम परिचय दिया। 77 वर्ष की आयु में हमसे विदा लेने वाले घनश्याम प्रसाद सिंह का जीवन त्याग, समर्पण और राष्ट्रसेवा का जीवंत प्रतीक रहा।

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हवलदार घनश्याम प्रसाद सिंह श्रद्धांजलि

रणभूमि में अद्भुत शौर्य

1971 के युद्ध में उन्होंने सिग्नल कोर के सिपाही के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। युद्ध की आधिकारिक घोषणा से पहले ही तैयारियां प्रारंभ हो चुकी थीं। उन्हें 33 कोर के साथ मिलकर गुप्त सूचनाएं एकत्रित करने का दायित्व सौंपा गया। यह कार्य मई माह से ही शुरू हो गया था।

उनकी ड्यूटी मुक्तिवाहिनी के सैनिकों के साथ समन्वय स्थापित कर सीमावर्ती क्षेत्रों में रातभर भ्रमण करना, पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों, सैन्य वाहनों की आवाजाही तथा उनके सिग्नल इंटरसेप्ट कर खुफिया जानकारी जुटाना था। यह सूचनाएं प्रतिदिन सुबह होने से पहले 33 कोर मुख्यालय तक पहुंचाई जाती थीं।

पहचान छिपाने के लिए वे बांग्लादेशी नागरिकों की तरह लूंगी और टी-शर्ट पहनकर अलग-अलग घरों में ठहरते थे। उन्हें बांग्ला भाषा नहीं आती थी, फिर भी जोखिम उठाकर जासूसी कार्य करना युद्ध का अहम हिस्सा था। दिसंबर माह में युद्ध के मध्य उन्हें विशेष कार्यवश भारत-भूटान सीमा पर भेजा गया।

सैन्य सेवा की शुरुआत और सम्मान

घनश्याम प्रसाद सिंह 22 फरवरी 1967 को पटना में भारतीय सेना के सिग्नल कोर में भर्ती हुए थे। अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें ईस्टर्न स्टार, संग्राम मेडल तथा विदेश सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। उनका सैन्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

निधन से अपूरणीय क्षति

1971 के वीर योद्धा एवं संगठन के सक्रिय सदस्य के आकस्मिक निधन से क्षेत्र और पूर्व सैनिक समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जमशेदपुर के सदस्यों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

संगठन के प्रतिनिधियों—नरसिंह सिंह, परशुराम सिंह, ओ.पी. प्रसाद, वरुण कुमार, डी.एन. सिंह एवं राकेश चौधरी—ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका असामयिक निधन संगठन के लिए अपूरणीय क्षति है।

हवलदार घनश्याम प्रसाद सिंह श्रद्धांजलि

प्रेरणा बनकर जीवित रहेंगे

आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, परंतु उनकी वीरता, अनुशासन, सेवाभाव और राष्ट्रप्रेम की गाथाएं सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। राष्ट्र अपने इस वीर सपूत को हमेशा श्रद्धा और सम्मान से याद रखेगा।

विनम्र श्रद्धांजलि। 🙏

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