जगन्नाथपुर सीएचसी छेड़खानी मामला: छात्राओं के गंभीर आरोप से मचा हड़कंप, 5 बड़े सवाल खड़े

जगन्नाथपुर

जगन्नाथपुर: जगन्नाथपुर सीएचसी छेड़खानी मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के लिए एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दा बन गया है। जगन्नाथपुर प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने प्रभारी चिकित्सक पर छेड़खानी और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया है।

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इस घटना के सामने आने के बाद जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई है।

  1. जगन्नाथपुर सीएचसी छेड़खानी मामला क्या है?

  2. छात्राओं के आरोप क्या हैं?

  3. प्रशासन की कार्रवाई

  4. डॉक्टर का पक्ष

  5. सुरक्षा और जवाबदेही पर 5 बड़े सवाल

जगन्नाथपुर सीएचसी छेड़खानी मामला क्या है?

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि इलाज के दौरान डॉक्टर ने अनुचित टिप्पणी की और उन्हें असहज स्थिति में डालने की कोशिश की।

छात्राओं का कहना है कि 2 फरवरी 2026 को एक बीमार छात्रा को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां अभिभावकों और अन्य छात्राओं को बाहर भेज दिया गया।

घटना के बाद छात्राओं ने सामूहिक रूप से शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्यालय की वार्डन लक्ष्मी पाड़िया ने तत्काल इसकी सूचना जिला शिक्षा विभाग और सिविल सर्जन कार्यालय को भेज दी है। शिकायत मिलने के बाद एक टीम विद्यालय पहुंची और छात्राओं से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। हालांकि अब तक जांच की अंतिम रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक रूप से कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

यह घटनाक्रम ही अब जगन्नाथपुर सीएचसी छेड़खानी मामला के रूप में सामने आया है।

छात्राओं के गंभीर आरोप

  • इलाज के दौरान अनुचित टिप्पणी

  • अकेले कमरे में बुलाने का प्रयास

  • अभिभावकों को बाहर भेजना

  • छात्राओं में भय का माहौल

छात्राओं ने सामूहिक रूप से शिकायत दर्ज कराई और सुरक्षा की मांग की।

प्रशासन की कार्रवाई

पश्चिमी सिंहभूम की सिविल सर्जन डॉ. भारती मिंज ने पुष्टि की कि जगन्नाथपुर सीएचसी छेड़खानी मामला उनके संज्ञान में है और जांच टीम गठित कर दी गई है।

विद्यालय की वार्डन द्वारा जिला शिक्षा विभाग को सूचना भेजी गई। जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

डॉक्टर का पक्ष

सीएचसी प्रभारी ने आरोपों को साजिश बताया है। उनका कहना है कि अस्पताल में 36 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और वे निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं।

5 बड़े सवाल जो उठ रहे हैं

  1. क्या छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है?

  2. क्या मेडिकल जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता है?

  3. क्या अस्पताल में महिला स्टाफ की अनिवार्य उपस्थिति होनी चाहिए?

  4. शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई क्यों जरूरी है?

  5. क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई गाइडलाइन बनेगी?

निष्कर्ष

जगन्नाथपुर सीएचसी छेड़खानी मामला ने छात्राओं की सुरक्षा, चिकित्सा व्यवस्था की पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन यह स्पष्ट है कि छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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