चाईबासा में आदिवासी उरांव समाज संघ का 79वां स्थापना दिवस संपन्न, मेधावी छात्र-छात्राओं और प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

आदिवासी उरांव समाज

चाईबासा। आदिवासी उरांव समाज संघ, चाईबासा का 79वां स्थापना दिवस मंगलवार को स्थानीय पिल्लई टाउन हॉल में पारंपरिक उल्लास और सामाजिक एकजुटता के साथ मनाया गया। देर शाम तक चले इस समारोह में समाज के महिला-पुरुष, युवा, छात्र-छात्राएं और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम में समाज की उपलब्धियों, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक एकता पर विशेष जोर दिया गया।

दीप प्रज्वलन और श्रद्धांजलि के साथ हुआ शुभारंभ

समारोह के मुख्य अतिथि अपर पुलिस अधीक्षक राहुल देव बड़ाईक थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में झारखंड वैश्य संघर्ष मोर्चा के जिलाध्यक्ष सुनील प्रसाद साव तथा मानद अतिथि के रूप में डॉ. जगरनाथ हेंब्रम और कांग्रेस जिला प्रेस प्रवक्ता त्रिशानु रॉय उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद आदिवासी उरांव समाज संघ के संस्थापकों एवं हूल दिवस के अवसर पर सिद्धू-कान्हू को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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आदिवासी उरांव समाज

1948 में हुई थी समाज संघ की स्थापना

समाज के अध्यक्ष संचू तिर्की ने स्वागत भाषण देते हुए संगठन की भूमिका और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। मुख्य सलाहकार सहदेव किस्पोट्टा ने बताया कि आदिवासी उरांव समाज संघ की स्थापना वर्ष 1948 में समाज को संगठित, शिक्षित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि संस्थापकों के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रेरणा बने हुए हैं और हर वर्ष 30 जून को स्थापना दिवस मनाकर उनके योगदान को याद किया जाता है।

शिक्षा और प्रतिभा सम्मान पर रहा विशेष जोर

समाज के लाइब्रेरियन संजय कच्छप ने युवाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही युवाओं को बेहतर भविष्य और सरकारी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सफलता दिला सकती है। स्थापना दिवस के अवसर पर चाईबासा के सातों अखाड़ों एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मैट्रिक, इंटर और टैलेंट हंट प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले करीब 150 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। साथ ही सरकारी सेवा में नव नियुक्त युवक-युवतियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी शॉल और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।

समाज की एकजुटता और सेवा भावना की सराहना

मुख्य अतिथि राहुल देव बड़ाईक ने कहा कि उरांव समाज की एकता, सेवा भावना और सांस्कृतिक विरासत अनुकरणीय है। उन्होंने समाज द्वारा संचालित एंबुलेंस सेवा और रक्तदान समूह की सराहना करते हुए इसे मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। विशिष्ट अतिथि सुनील प्रसाद साव ने भी समाज की प्रगतिशील सोच और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता की प्रशंसा करते हुए भविष्य में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में अनिल लकड़ा, बाबूलाल बरहा, लक्ष्मण बरहा, दुर्गा खलखो, लालू कुजूर, भगवान दास तिर्की, पंकज खलखो, सुमित बरहा, रोहित खलखो, बिष्णु मिंज, विक्रम खलखो सहित समाज के अनेक सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही।

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