कुर्मी-कुड़मी को एसटी में शामिल करने की मांग का आदिवासी हो समाज महासभा ने किया विरोध, कुर्मी समाज दुबारा रेल रोको आंदोलन करती है तो समन्वय समिति भी विरोध स्वरूप करेगी कार्रवाई

Chaibasa :- झारखंड सरकार द्वारा खतियान 1932 के आधार पर स्थानीय नीति को लागू करने के निर्णय और रेल रोको आंदोलन कर कुरमी – कुर्मी – महतो समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने की मांग का आदिवासी हो समाज महासभा ने जोरदार विरोध किया है. 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति और रेल रोको आंदोलन जैसी घटनाओं के कारण कोल्हान सहित अन्य जगहों के लोगों में तरह तरह के प्रश्न उठने लगे हैं. इन्ही परिस्थितियों को देखते हुए आदिवासी हो समाज महासभा की अगुवाई में अन्य आदिवासी समुदायों एवं संगठनों के साथ आज प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया.

इस दौरान आदिवासी हो समाज महासभा के केन्द्रीय अध्यक्ष अर्जुन मुन्दुईया ने कहा है कि कुर्मी-कुड़मी के द्वारा एसटी में शामिल किये जाने की मांग का विरोध किया जाएगा. किसी भी दृष्टिकोण से उनकी मांग जायज नहीं है. इससे आदिवासी समाज का बहुत बड़ा नुकसान होगा. महासभा 16 अक्टूबर को सभी आदिवासी समुदाय एवं संगठनो की बैठक बुलाई है. जिसमें समन्वय समिति का गठन किया जाएगा. महाजुटान कर आक्रोश व्यक्त किया जाएगा. आवश्यकता पड़ी तो कोल्हान बंद भी किया जाएगा. बंगाल में कुर्मी समाज द्वारा पुनः रेल रोको कार्यक्रम चलाया गया तो, समन्वय समिति भी विरोध स्वरूप कार्रवाई करेगा.

उन्होंने कहा कि कुर्मी समाज को अंग्रेजो ने 1820 से 1830 के बीच इस क्षेत्र में अफीम के खेती के लिए लाकर बसाये थे. यह लोग संपन्न कृशक एवं शूरवीर क्षत्रिय थे. इस समाज के लोग पुरे देश में ओबीसी के सूची में हैं. इसलिए इन्हें एसटी में शामिल करने का प्रश्न ही नहीं उठता है.

 

कुर्मी ST में शामिल हुए तो हम लोग जानवर रखने जैसे हो जायेंगे

आदिवासी हो समाज महासभा के केन्द्रीय अध्यक्ष बबलु सुंडी ने कहा है कि वे लोग कहते है कि 1950 से पूर्व एसटी में शामिल थे. तो 1950 से 2022 तक क्या कर रहे थे. उन्होंने कहा कि अगर कुर्मी को एसटी में शामिल किया गया तो हमलोगो की स्थिति जानवरो को रखने जैसे हो जाएगी. उन्होंने कहा कि 1932 का खतियान नहीं 1964-65 के खतियान पर स्थानीय नीति बननी चाहिए.

सांसद-विधायक मसौदा पर हस्ताक्षर कर अपने पैरो पर खूद मार रही कुल्हाड़ी

हो महासभा के पूर्व महासचिव मुकेश बिरूवा ने कहा है कि कुर्मी समाज आर्थिक, शैक्षणिक रूप से काफी संपन्न है, तो निश्चित रूप से आदिवासियो की जमीन, नौकरी के साथ-साथ सांसद-विधायक सभी पदो पर अशीन हो जायेगें. हमारे सांसद-विधायक मसौदा पर हस्ताक्षर कर अपने पैरो पर खूद कुल्हाड़ी मार रही है. उन्होंने कहा कि एसटी में शामिल करने के जो पांच माप-दण्ड है, उसमें कुर्मी समाज कही भी नहीं आते हैं. महासभा के सरायकेला जिला अध्यक्ष सुरेश चन्द्र सोय ने कहा कि स्थानीय नीति पूर्ण रूपेन राजनीतिक है, इस पर सरकार को निर्णय लेना है. लेकिन इसे केन्द्र को भेज दिया गया है.

प्रेस वार्ता में उपाध्यक्ष कृश्ण चन्द्र बिरूली, महासचिव यदुनाथ तियु, बलभद्र मेलगांडी, युवा महासभा के केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ बबलु सुंडी, महासचिव गब्बर सिंह हेम्ब्रम, इपील सामड, प्रितम सहित काफी संख्या में महासभा एवं युवा महासभा के पदाधिकारी-सदस्य आदि उपस्थित थे.

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