​ Apurva Anand Ironman Jamshedpur : झारखंड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि, अपूर्वा आनंद बने राज्य के पहले ‘फुल आयरनमैन’, ऑस्ट्रेलिया में लहराया परचम

Apurva Anand Ironman Jamshedpur, अपूर्वा आनंद आयरन मैन जमशेदपुर

Jamshedpur (जमशेदपुर) : लौहनगरी जमशेदपुर के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। लोयोला स्कूल के पूर्व छात्र और टाटा स्टील के पूर्व अधिकारी दिनकर आनंद के सुपुत्र अपूर्वा आनंद ने दुनिया की सबसे कठिन एकदिवसीय प्रतियोगिताओं में से एक ‘फुल आयरनमैन’ (Full Ironman) को सफलतापूर्वक पूरा कर इतिहास रच दिया है। वे यह गौरव हासिल करने वाले झारखंड के पहले एथलीट बन गए हैं।

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Apurva Anand Ironman Jamshedpur, अपूर्वा आनंद आयरन मैन जमशेदपुर
अपूर्वा आनंद आयरन मैन जमशेदपुर

ऑस्ट्रेलिया के केर्न्स में पूरी की ‘अग्निपरीक्षा’

​अपूर्वा ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि ऑस्ट्रेलिया के केर्न्स (Cairns) में आयोजित प्रतियोगिता में हासिल की। इस रेस को दुनिया की सबसे कठिन शारीरिक और मानसिक परीक्षाओं में से एक माना जाता है। अपूर्वा ने निर्धारित 17 घंटे की समय सीमा के भीतर निम्नलिखित तीन चरणों को पूरा किया:

  • 3.8 किमी: ओपन वाटर स्विमिंग (समुद्र में तैराकी)
  • 180 किमी: साइकिलिंग (दुर्गम रास्तों पर)
  • 42.2 किमी: फुल मैराथन दौड़

जमशेदपुर के स्विमिंग पूल से शुरू हुआ था सफर

​टाटा स्टील के रिटायर्ड चीफ (स्पेयर्स, सर्विसेज एंड प्रोजेक्ट्स) दिनकर आनंद के घर जन्मे अपूर्वा की नींव जमशेदपुर के खेल संस्कृति में ही पड़ी थी। एक पूर्व राष्ट्रीय स्तर के तैराक रहे अपूर्वा ने शहर के प्रतिष्ठित क्लबों में प्रशिक्षण लिया। लोयोला स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने मणिपाल से इंजीनियरिंग और मनीला से एमबीए किया। वर्तमान में वे गुड़गांव में टाटा डिजिटल के साथ कार्यरत हैं।

कठिन अनुशासन और परिवार का साथ

​एक पेशेवर करियर और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच आयरनमैन की तैयारी करना आसान नहीं था। अपूर्वा ने करीब एक साल तक कठोर प्रशिक्षण लिया। इस सफर की खास बात यह रही कि उनका परिवार भी इस खेल भावना में रंगा नजर आया:

  • ​अपूर्वा की पत्नी, जो स्वयं एक मैराथन धावक हैं, ने उनके साथ ट्रेनिंग की।
  • ​उनकी बेटी ने मुख्य प्रतियोगिता से एक दिन पहले आयोजित ‘आयरनकिड्स’ (IronKids) स्पर्धा में हिस्सा लेकर सबका दिल जीता।

युवाओं के लिए संदेश: “धैर्य और निरंतरता ही जीत की कुंजी”

​अपनी इस उपलब्धि पर अपूर्वा का कहना है कि वे चाहते हैं कि झारखंड जैसे राज्यों के युवा छोटे शहरों से निकलकर बड़े सपने देखें। उनके अनुसार, बड़ी सफलताएं रातों-रात नहीं मिलतीं, बल्कि लंबे समय तक अनुशासन और धैर्य बनाए रखने से हासिल होती हैं।

​अपूर्वा आनंद की यह सफलता न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के एथलीट्स के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो दुनिया की कोई भी चुनौती पार की जा सकती है।

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