MSME मंत्रालय इंडो डेनिश टूल रूम के 4 वर्षीय डिप्लोमा कोर्स दीक्षांत समारोह में शामिल हुए आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो, कहा-युवा देश की संपत्ति झारखंड से है लोगों को कई उम्मीदें हैं

Saraikela :- जिले के आदित्यपुर स्थित भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय अधीन संचालित इंडो डेनिश टूल रूम ने मंगलवार को 4 वर्षीय डिप्लोमा टूल एंड डाई मेकिंग कोर्स के दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो शामिल हुए.

4 वर्षीय डिप्लोमा इन टूल एंड दिए मेकिंग कोर्स दीक्षांत समारोह मे आजसू सुप्रीमो के साथ गोमिया विधायक लंबोदर महतो, आजसू के डॉ देवशरण भगत, एसिया अध्यक्ष संतोष खेतान, टाटा स्टील विभाग की प्लानिंग हेड कुमुद लता सिंह, आईडीटीआर जीएम आनंद दयाल, डीजीएम आशुतोष कुमार शामिल रहे. कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई. इस मौके पर जीएम आनंद दयाल ने स्वागत भाषण में अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि वर्षों पूर्व 20 छात्रों से शुरू हुआ इंडो डेनिश टूल रूम संस्थान 14 हज़ार से भी अधिक छात्रों को तकनीकी दक्ष बनाकर उन्हें रोजगार मुहैया करा चुका है. उन्होंने बताया कि एमएसएमई मंत्रालय के सहयोग से छात्रों को मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया सरकार स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है. संस्थान के डीजीएम आशुतोष कुमार ने अपने संबोधन में बताया कि एमएसएमई टूल रूम में जल्द ही साइकिल निर्माण उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कोर्स शुरू होंगे. जिसका लाभ बड़ी संख्या में तकनीकी छात्रों को मिलेगा. आदित्यपुर स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन एसिया के अध्यक्ष संतोष खेतान ने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की पहचान ऑटोमोबाइल सेक्टर के रूप में है. वही आगे भविष्य में आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र साइकिल इंडस्ट्री के लिए भी जाना जा सकेगा. दीक्षांत समारोह में सैकड़ों सफल छात्रों को उपाधि और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया. इसके साथ ही टॉपर छात्रों को जियाडा, आरएसबी, एसिया जैसे संस्थानों ने टॉपर छात्रों को पुरस्कार के रुप में चेक वितरित किया गया.

समारोह के मुख्य अतिथि आजसू पार्टी सुप्रीमो और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने सर्टिफिकेट वितरण के दौरान छात्रों को अपने संबोधन से उत्साह वर्धन करते हुए कहा कि अब झारखंड में संभावना नहीं निर्माण को धरातल पर उतारने का समय है. हमें पढ़ लिखकर एकल नहीं बल्कि सोसाइटी के बारे में सोचने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि विश्व में दक्षता की जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है, इसमें हमें अपनी काबिलियत साबित करनी है.

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