अमोल वेणुकांत होमकर : आईजी अभियान में नक्सल विरोधी अभियानों के सूत्रधार, अब सीआरपीएफ में निभाएंगे बड़ी भूमिका

अमोल वेणुकान्त होमकर

झारखंड के जांबाज आईपीएस अधिकारी अमोल वेणुकांत होमकर की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को राज्य सरकार की मिली मंजूरी

Ranchi (रांची)। झारखंड पुलिस में आईजी अभियान के रूप में नक्सलियों के खिलाफ सबसे प्रभावी और सफल अभियान चलाने वाले जांबाज आईपीएस अधिकारी अमोल वेणुकांत होमकर अब नई जिम्मेदारी में नक्सलियों को खुली चुनौती देंगे। उनकी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर राज्य सरकार ने अपनी मुहर लगा दी है।

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अमोल वेणुकांत होमकर
अमोल वेणुकांत होमकर

सीआरपीएफ में आईजी बने ए.वी. होमकर

झारखंड कैडर (2004 बैच) के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमोल वेणुकांत होमकर को केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा विरमित कर दिया गया है। आदेश के अनुसार, वे झारखंड पुलिस में अपने वर्तमान दायित्वों से मुक्त होकर अब दिल्ली में सीआरपीएफ में आईजी (इंस्पेक्टर जनरल) के पद पर नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना

झारखंड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि भारत सरकार, गृह मंत्रालय के पत्र के आलोक में अमोल वेणुकांत होमकर (आईपीएस, झारखंड कैडर, 2004 बैच) की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति स्वीकृत की जाती है।

आदेश में यह भी कहा गया है कि उन्हें झारखंड में जिस पद पर पदस्थापित माना जा रहा था, उससे कार्यमुक्त किया जाता है, ताकि वे केंद्र में नई पोस्टिंग जॉइन कर सकें। अब उनकी सेवाएं भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन मानी जाएंगी।

आईजी अभियान के रूप में सबसे सफलतम कार्यकाल

अमोल वेणुकांत होमकर का करियर झारखंड पुलिस में बेहद प्रभावशाली रहा है। वे रामगढ़ और हजारीबाग जैसे संवेदनशील जिलों में एसपी रहे, वहीं जमशेदपुर में एसएसपी के रूप में भी उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया। रांची डीआईजी के रूप में भी उनके कार्यकाल की सराहना हुई।

आईजी अभियान के पद पर लगभग साढ़े तीन वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ सुनियोजित और आक्रामक रणनीति अपनाई। उनके नेतृत्व में झारखंड पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियानों में ऐतिहासिक सफलता हासिल की।

नक्सलियों के मजबूत गढ़ों में निर्णायक प्रहार

होमकर की रणनीति का सबसे बड़ा असर नक्सलियों के कुख्यात गढ़—पारसनाथ, बूढ़ापहाड़ और लुगु पहाड़—में देखने को मिला। इन इलाकों में चलाए गए अभियानों ने नक्सली नेटवर्क की कमर तोड़ दी।
उनके कार्यकाल में न केवल बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, बल्कि कई बड़े एनकाउंटर भी हुए, जिससे झारखंड में नक्सली गतिविधियां निर्णायक रूप से कमजोर पड़ीं।

नई भूमिका में भी बड़ी उम्मीदें

अब सीआरपीएफ में आईजी के रूप में अमोल वेणुकांत होमकर की तैनाती से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केंद्र स्तर पर भी अभियानों को नई धार मिलने की उम्मीद है। झारखंड में उनके सफल अनुभव का लाभ अब राष्ट्रीय स्तर पर लिया जाएगा, जिससे नक्सल विरोधी लड़ाई और मजबूत होने की संभावना है।

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