चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित B.Ed पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों ने B.Ed मेथड पेपर शुल्क कमी की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर दी है। द्वितीय सेमेस्टर के मेथड पेपर में अत्यधिक शुल्क लगाए जाने के विरोध में छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक महोदया को सामूहिक आवेदन सौंपा।
छात्रों का कहना है कि बढ़ी हुई फीस के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। यदि समय रहते B.Ed मेथड पेपर शुल्क कमी पर निर्णय नहीं लिया गया, तो कई विद्यार्थियों को कोर्स बीच में छोड़ना पड़ सकता है।
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छात्रवृत्ति लंबित, फीस का दबाव जारी
झामुमो जिला छात्र मोर्चा अध्यक्ष सनातन पिंगुवा ने बताया कि अब तक बड़ी संख्या में B.Ed विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) की राशि प्राप्त नहीं हुई है। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन द्वारा फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि:
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लंबित छात्रवृत्ति राशि शीघ्र जारी की जाए
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B.Ed मेथड पेपर शुल्क कमी तत्काल लागू हो
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छात्रवृत्ति मिलने तक फीस वसूली पर रोक लगे
सनातन पिंगुवा ने यह भी कहा कि ग्रामीण एवं आदिवासी समुदाय से आने वाले छात्र सबसे अधिक प्रभावित हैं। आर्थिक तंगी के कारण वे मानसिक दबाव में हैं।
छात्र नेताओं की चेतावनी
पूर्वी छात्र संघ सचिव विपिन बारिक ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्र शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
उन्होंने कहा कि B.Ed मेथड पेपर शुल्क कमी केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि शैक्षणिक समानता का प्रश्न है।
कॉलेजों की शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल
छात्रों ने कई गंभीर आरोप भी लगाए, जिनमें शामिल हैं:
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कई कॉलेजों में नियमित शिक्षक नहीं
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पढ़ाई की गुणवत्ता अत्यंत कमजोर
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प्रैक्टिकल व अकादमिक मार्गदर्शन का अभाव
इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन फीस वसूली में सख्ती बरत रहा है। छात्रों का कहना है कि जब मूलभूत शैक्षणिक सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं, तो अधिक शुल्क लेना अन्यायपूर्ण है।
आदिवासी एवं ग्रामीण छात्रों पर सबसे ज्यादा असर
पिपुन बारिक ने बताया कि छात्रवृत्ति नहीं मिलने से गरीब एवं आदिवासी पृष्ठभूमि के विद्यार्थी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई छात्रों को कर्ज लेकर फीस जमा करनी पड़ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
“एजुकेशन के नाम पर सिर्फ पैसा वसूलना संस्थानों की प्राथमिकता बन गई है।”
छात्रों ने स्पष्ट कहा कि B.Ed मेथड पेपर शुल्क कमी और छात्रवृत्ति भुगतान उनके भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
शिक्षा के व्यावसायीकरण पर उठे सवाल
छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि B.Ed जैसे पेशेवर कोर्स में अत्यधिक शुल्क वसूली शिक्षा के मूल उद्देश्य के विपरीत है। यदि यही स्थिति रही, तो शिक्षक बनने का सपना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए असंभव हो जाएगा।
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