Chaibasa (चाईबासा) : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में मानव‑हाथी संघर्ष ने भयावह रूप ले लिया है, जहां झुंड से बिछड़े एक दंतैल हाथी ने चाईबासा वन प्रमंडल के कई गांवों में तबाही मचा दी। साल 2026 के पहले हफ्ते में ही इस उन्मादी हाथी के हमले में अब तक 8 लोगों की जान जा चुकी है और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत 8 की मौत
नोवामुंडी क्षेत्र के बाबरिया मुंडासाई गांव में हाथी ने देर रात एक कच्चे घर को तोड़ते हुए सो रहे परिवार पर हमला कर दिया।हमले में सनातन मेराल, उनकी पत्नी जोंकों कुई और दो मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई।इसी कड़ी में दूसरे परिवार से मोगदा लागुरी को भी टस्कर ने पटक‑पटक कर मार डाला, जबकि बड़ापासेया गांव में एक अन्य व्यक्ति की जान चली गई।हाटगम्हरिया रेंज के सियालजोड़ा गांव में हाथी ने घर में घुसकर दो लोगों को बाहर घसीटकर मार डाला, जिससे कुल मृतकों की संख्या 8 पर पहुंच गई।

रात में गांवों पर हमला, दिन में जंगल में छिपा रहता है
वनकर्मियों और ग्रामीणों के मुताबिक, यह नर हाथी दिनभर घने जंगलों में छिपा रहता है और अंधेरा होते ही गांवों की ओर बढ़ जाता है।रास्ते में आने वाले घरों को तोड़कर वह सोए हुए लोगों को पटक कर या घसीटकर मार रहा है, जिससे लोग रात होते ही घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटकने को मजबूर हैं।प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हाथी के दो लंबे दांत हैं और वह पूरी तरह वयस्क टस्कर नजर आता है, जो झुंड से अलग होने के बाद लगातार आक्रामक बना हुआ है।

वन विभाग और प्रशासन की कोशिशें, फिर भी हाथ नहीं लग पाया
चाईबासा वन प्रमंडल की टीमें लगातार इलाके में कैंप कर रही हैं और ड्रोन व थर्मल सेंसर की मदद से हाथी की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश कर रही हैं।पश्चिम बंगाल से बुलाई गई विशेष टीम भी जंगलों में सर्च ऑपरेशन चला रही है, लेकिन अभी तक हाथी को रेंज से बाहर खदेड़ने या नियंत्रित करने में सफलता नहीं मिल पाई है।वन विभाग ने प्रभावित गांवों में माइकिंग कर लोगों से रात में घरों से बाहर न निकलने, समूह में रहने और अलाव जलाकर सतर्क रहने की अपील की है।
ट्रेंकुलाइज कर काबू करने की तैयारी
बेकाबू हो चुके हाथी को शांत करने के लिए वन विभाग ने ट्रेंकुलाइजिंग ऑपरेशन की योजना बनाई है।विभाग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले वन्यजीव पुनर्वास एवं संरक्षण संगठन की विशेषज्ञ टीम से संपर्क कर टस्कर को ट्रेंकुलाइज गन से बेहोश करने का प्रस्ताव भेजा है, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से जंगल के भीतर शिफ्ट किया जा सके।विभागीय सूत्रों के अनुसार, अनुकूल परिस्थितियां बनने पर बुधवार से बेहोशी का यह ऑपरेशन शुरू कराया जा सकता है।
विशेषज्ञों की राय :
हार्मोनल बदलाव और झुंड से बिछड़ना कारणवन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि नर हाथी के झुंड से अलग हो जाने और हार्मोनल बदलाव की स्थिति में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ने पर वह अत्यधिक आक्रामक हो सकता है।ऐसी स्थिति में टस्कर अक्सर मानव बस्तियों की ओर भटक जाता है और मामूली उकसावे या आवाज पर भी हिंसक प्रतिक्रिया देता है, जिससे इस तरह की दर्दनाक घटनाएं घटती हैं।
हाथी हमले से कब और कंहा कंहा हुई मौतें :
🟠 1 जनवरी
टोंटो प्रखंड के बांडीझारी गांव निवासी 35 वर्षीय मंगल सिंह हेंब्रम की मौके पर मौत।
बिरसिंहहातु गांव के कुचुबासा टोली निवासी 55 वर्षीय उर्दूप बहंदा की भी जान गई।
सदर प्रखंड के रोरो गांव निवासी 57 वर्षीय विष्णु सुंडी की मौत।
इसी दौरान मानी कुंटिया और सुखमति बहंदा गंभीर रूप से घायल।
🟠 2 जनवरी
गोइलकेरा थाना क्षेत्र के सायतवा गांव में 13 वर्षीय रेंगा कयोम की कुचलकर मौत।
चक्रधरपुर के बाईपी गांव की 10 वर्षीय ढिंगी गागराई गंभीर रूप से घायल।
🟠 4 जनवरी
गोइलकेरा प्रखंड के संतरा वन क्षेत्र, अमराई कितापी गांव में 47 वर्षीय महिला की मौत।
पति रंजन टोपनो और पुत्र काहिरा टोपनो (10) घायल।
🟠 5 जनवरी
मिस्त्रीबेड़ा वन ग्राम में 50 वर्षीय जोंगा लागुरी की मौत।
पति चंद्र मोहन लागुरी (52) गंभीर रूप से घायल।
🟠 6 जनवरी
गोइलकेरा के सोवा गांव में कुंदरा बाहदा 6 वर्षीय, कोदमा बाहदा 8 माह की सामू बाहदा की मौत, 3 वर्षीय जिंगीं बाहदा गंभीर रूप से घायल
इसके बाद कुईलसूता गांव में 21 वर्षीय जगमोहन सवईया की भी जान गई।
http://गोईलकेरा में जंगली हाथी का आतंक एक ही परिवार के तीन सदस्यों की कुचलकर मौत, क्षेत्र में दहशत

