Chaibasa (चाईबासा) : सदर अस्पताल में बच्चे के शव को झोले में ले जाने वाली शर्मनाक घटना को लेकर पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने इस घटना के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की विफलता को जिम्मेदार ठहराया है।

व्यवस्था पर उठाए सवाल:
गीता कोड़ा ने कहा कि यह झारखंड के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि एक पिता को अपने 4 महीने के बच्चे का शव झोले में भरकर ले जाना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों का फंड स्वास्थ्य व्यवस्था पर खर्च करने का दावा करने वाली सरकार आखिर एक शव वाहन क्यों उपलब्ध नहीं करा पाई?
सिविल सर्जन के बयान पर पलटवार:
सिविल सर्जन द्वारा “परिजनों की जल्दबाजी” वाले तर्क पर गीता कोड़ा ने कहा कि प्रशासन अपनी गलती छुपाने के लिए पीड़ित परिवार पर दोष मढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर अस्पताल में संवेदना होती, तो अधिकारी उस पिता को रोककर स्वयं वाहन की व्यवस्था सुनिश्चित करते, न कि उन्हें घंटों इंतजार करने को कहते।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली:
पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि कोल्हान क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक, चाईबासा सदर अस्पताल की स्थिति दयनीय है। उन्होंने कहा कि यहाँ न केवल एम्बुलेंस की कमी है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं और दवाओं के लिए भी गरीब मरीजों को भटकना पड़ता है।
मुआवजे और कार्रवाई की मांग:
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए और इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार स्वास्थ्य अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।








