नोवामुंडी। आदिवासी समाज के महान नेता, स्वतंत्रता सेनानी एवं संविधान निर्माता मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की जयंती के अवसर पर आज 3 जनवरी 2026 को कोटगढ़, नोवामुंडी में एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन सेतेंग दाः षिरजोन, नोवामुंडी के तत्वावधान में जयपाल सिंह मुंडा प्रतिमा अनावरण सह दीपुरी सम्मेलन के रूप में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकु उपस्थित रहे। विधायक सोनाराम सिंकु ने विधिवत रूप से फीता काटकर मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की प्रतिमा का अनावरण किया। प्रतिमा अनावरण के पश्चात उपस्थित जनसमूह ने मरांग गोमके के ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में कोटगढ़ बस स्टैंड का नाम परिवर्तित कर “जयपाल सिंह मुंडा चौक” रखने की घोषणा की गई। इस निर्णय से क्षेत्रवासियों में विशेष उत्साह देखा गया, जिसे आदिवासी समाज की अस्मिता, सम्मान और गौरव से जोड़कर देखा जा रहा है।
विधायक सोनाराम सिंकु का संबोधन
अपने संबोधन में विधायक सोनाराम सिंकु ने कहा कि मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ने आदिवासी समाज के अधिकार, शिक्षा और आत्मसम्मान के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनका जीवन संघर्ष, नेतृत्व और दूरदर्शिता का प्रतीक है।
उन्होंने युवाओं से जयपाल सिंह मुंडा के विचारों को आत्मसात कर सामाजिक न्याय, एकता और समाज के समग्र विकास के लिए कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित
सम्मेलन में अमरजीत लगुरी, भीमसिंह चातोम्बा, शंकर चातोम्बा, चंद्रमोहन चातोम्बा, सुमित बालमुचू, बुधराम चंपिया, निरंजन बोबोंगा, सुरेंद्र चातोम्बा, सुनील पूरती, बामिया चंपिया, जगदीश सिंकु,
नोवामुंडी कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष मंजीत प्रधान, युवा कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष मामूर अंसारी, पेटेता मुखिया जेना पूर्ती, मुंडा सोमनाथ सिंकु, प्रदीप प्रधान, रंजीत गगराई, रोशन पान, क्रांति तिरिया, मुंडा अजय लगुरी, मोरान सिंह केराई, मो. जाविद, दानिश हुसैन, रामबिलास प्रजापति, सुरेश प्रजापति, प्रकाश गोप, आबिद हुसैन, सन्नी रजक सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी वर्ग, युवा एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।
पूरे कार्यक्रम का वातावरण श्रद्धा, गौरव, सांस्कृतिक चेतना और उत्साह से परिपूर्ण रहा। यह आयोजन न केवल मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा को सम्मान देने का अवसर बना, बल्कि आदिवासी समाज की एकता और पहचान को सशक्त करने वाला सिद्ध हुआ।



