पश्चिम सिंहभूम: वाहन ऋण एनओसी विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उपभोक्ता आयोग ने बैंकिंग सेवा में देरी को प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए बैंक को ₹20,000 मुआवजा तथा ₹5,000 वाद व्यय देने का आदेश दिया है। यह मामला झारखंड के पश्चिम सिंहभूम निवासी गौरव रॉय द्वारा दायर परिवाद से संबंधित है, जिसमें वाहन ऋण चुकता होने के बाद भी समय पर एनओसी जारी नहीं करने का आरोप लगाया गया था।
यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों और बैंकिंग जवाबदेही के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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क्या है पूरा मामला – वाहन ऋण एनओसी विवाद की पृष्ठभूमि
परिवादी गौरव रॉय ने ओडिशा के केओंझार जिला अंतर्गत बरबिल स्थित एक निजी बैंक शाखा के प्रबंधक के विरुद्ध उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया था। वर्ष 2020 में उन्होंने टाटा कंपनी का वाहन खरीदने हेतु ₹30,74,321 का वाहन ऋण लिया था।
परिवादी के अनुसार:
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उन्होंने पूरा ऋण ब्याज सहित चुका दिया
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इसके बावजूद बैंक ने एनओसी जारी नहीं की
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वाहन हस्तांतरण संभव नहीं हो सका
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वाहन का बाजार मूल्य घट गया
इसी आधार पर परिवादी ने:
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₹3 लाख आर्थिक क्षति
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₹1 लाख मानसिक उत्पीड़न
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₹10,000 वाद व्यय
कुल ₹4.10 लाख मुआवजे की मांग की थी।
बैंक का पक्ष – एनओसी रोकने का कारण
बैंक की ओर से वाहन ऋण एनओसी विवाद में कई तर्क प्रस्तुत किए गए:
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ऋण वाणिज्यिक वाहन हेतु था
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मामला उपभोक्ता संरक्षण कानून में नहीं आता
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अनुबंध में आर्बिट्रेशन क्लॉज मौजूद था
बैंक ने स्वीकार किया कि संबंधित ऋण खाता बंद हो चुका था, लेकिन:
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दूसरे ऋण खाते में बकाया था
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“जनरल लियन” अधिकार लागू था
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इसी आधार पर एनओसी रोकी गई
बैंक के अनुसार:
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9 दिसंबर 2024 — अन्य ऋण चुकता
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24 फरवरी 2025 — एनओसी जारी
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3 मार्च 2025 — डाक से प्रेषित
आयोग की कानूनी व्याख्या
उपभोक्ता आयोग ने वाहन ऋण एनओसी विवाद में महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी की:
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वाणिज्यिक वाहन खरीदने मात्र से व्यक्ति उपभोक्ता श्रेणी से बाहर नहीं होता
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जब तक बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग सिद्ध न हो
आयोग ने यह भी माना:
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बकाया रहते एनओसी रोकना सेवा में कमी नहीं
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बैंक को अनुबंध अनुसार लियन अधिकार था
देरी को माना प्रशासनिक लापरवाही
हालांकि आयोग ने स्पष्ट कहा कि:
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अन्य ऋण चुकता होने के बाद
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लगभग ढाई माह की देरी
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उचित नहीं थी
इसे बैंक की प्रशासनिक लापरवाही माना गया।
आयोग का अंतिम फैसला
वाहन ऋण एनओसी विवाद में आयोग ने आंशिक राहत देते हुए आदेश दिया:
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₹20,000 मुआवजा
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₹5,000 वाद व्यय
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कुल ₹25,000 भुगतान
साथ ही:
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45 दिनों में भुगतान
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देरी पर 9% वार्षिक ब्याज
आदेश में दिए गए अतिरिक्त निर्देश
आयोग ने आगे निर्देशित किया:
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परिवादी 15 दिनों में मूल एनओसी प्राप्त करें
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बैंक समयसीमा का पालन करे
उपभोक्ता अधिकारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला
यह वाहन ऋण एनओसी विवाद कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
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बैंकिंग सेवा जवाबदेही तय
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एनओसी जारी करने की समयसीमा पर संकेत
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उपभोक्ता संरक्षण कानून की व्याख्या स्पष्ट
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लियन अधिकार की सीमा निर्धारित
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