चाईबासा(CHAIBASA): राजाबुरु खदान नियुक्ति विवाद को लेकर गुवा क्षेत्र में झारखंड मजदूर यूनियन की ओर से बेरोजगार महिला-पुरुषों की एक आकस्मिक बैठक शनिवार देर शाम आयोजित की गई। सेल प्रबंधन द्वारा राजाबुरु खदान को शीघ्र चालू किए जाने की तैयारियों के बीच स्थानीय ग्रामीणों में चिंता और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
बैठक की अगुवाई यूनियन अध्यक्ष मोहन महतो, महामंत्री हेमराज सोनार, उपाध्यक्ष सुभाष दास एवं सलाहकार कपिलेश्वर दोंगों ने संयुक्त रूप से की।
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स्थानीयों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग
बैठक को संबोधित करते हुए यूनियन महामंत्री हेमराज सोनार ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि राजाबुरु खदान नियुक्ति विवाद में स्थानीय ग्रामीणों की अनदेखी की गई, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा:
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खदान क्षेत्र के आसपास रहने वाले युवक-युवतियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए
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स्थानीय लोगों का संवैधानिक और नैतिक अधिकार है रोजगार
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बाहरी लोगों की नियुक्ति का विरोध होगा
आंदोलन की दी चेतावनी
यूनियन नेताओं ने एक स्वर में कहा कि खदान खुलने से रोजगार के अवसर अवश्य बढ़ेंगे, लेकिन यदि नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही तो खदान बंद कराने तक आंदोलन चलाया जाएगा।
प्रमुख चेतावनियां
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चरणबद्ध आंदोलन
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धरना-प्रदर्शन
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खदान कार्य बाधित करने की रणनीति
जमीन-जंगल से जुड़ा है स्थानीयों का अधिकार
ग्रामीणों ने कहा कि राजाबुरु खदान क्षेत्र उनकी जमीन, जंगल और पर्यावरण से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां रोजगार का पहला अधिकार स्थानीय निवासियों का बनता है।
उन्होंने यह भी कहा कि:
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विस्थापन का असर स्थानीयों पर पड़ता है
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पर्यावरणीय जोखिम भी ग्रामीण झेलते हैं
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इसलिए रोजगार प्राथमिकता अनिवार्य हो
बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी
बैठक में क्षेत्र के कई ग्रामीण मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:
सोमा महतो, आलोक डडका, पप्पू करुवा, मंगल लकड़ा, अविनाश, आकाश हुराद, मुन्ना करुवा, मोहन लागुरी, पन्दूश तुबीड, वीरु करुवा, कृष्णा गुच्छैत, मोहन पूर्ति, विनय सिंकू सहित अन्य शामिल हुए।
सभी ने एकजुट होकर स्थानीय हक की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
राजाबुरु खदान नियुक्ति विवाद अब क्षेत्र का प्रमुख सामाजिक-आर्थिक मुद्दा बनता जा रहा है। यदि सेल प्रबंधन स्थानीयों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करता, तो आने वाले दिनों में आंदोलन तेज होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।








