संचार क्रांति के दौर में भारत विश्व का सबसे बड़ा बाजार, लिहाजा विदेशी भी सीख रहे हैं हिंदी – एसबी सिंह

Chaibasa :- सूरजमल जैन डीएवी पब्लिक स्कूल में शिक्षकों की एक विचार गोष्ठी का आयोजन ‘हिंदी दिवस’ के अवसर पर किया गया। इसे संबोधित करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष एसबी सिंह ने कहा कि हिंदी से ही विदेशों में हमारी पहचान है। संचार क्रांति के दौर में भारत विश्व का सबसे बड़ा बाजार है, लिहाजा विदेशी भी हिंदी सीख रहे हैं । शब्द संपदा, भाषा प्रचलन क्षेत्र साहित्यिक विविधता इत्यादि की बदौलत हिंदी भाषा नंबर एक बनने की ओर अग्रसर है।

प्राचार्या सुश्री रेखा कुमारी ने हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी ही देश को एक सूत्र में पिरोए रख सकती है। इसका साहित्य काफी समृद्ध है। शिक्षक देवानन्द तिवारी ने कहा कि स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान हिंदी ने बड़ी ही कुशलता से देशवासियों का मार्गदर्शन किया। विदेशी भी हिंदी भाषा व संस्कृति की ओर अग्रसर हो रहे हैं क्योंकि यह संस्कारों की भाषा है । सुश्री सुमित्रा कुमारी ने कहा कि हिंदी का विकास खड़ी बोली के रूप में भारतेंदु युग की देन है। इसका विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ। डॉ सरिता साव ने कहा कि सभी भारतवासी तत्परता से इसे गतिशीलता प्रदान करने में अपना योगदान दें। हिंदी अभिव्यक्ति की भाषा है। इस अवसर पर शिक्षिका सीमा चौरसिया,मधु दास,सुधा सिंह व सुनिता प्रसाद ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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