Rourkela/चाईबासा: राउरकेला में सुरक्षा बलों को एक अहम सफलता मिली है। झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले की 19 वर्षीय महिला नक्सली मोगड़ी होनहागा ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। वह प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन से जुड़ी हुई थी और सक्रिय रूप से काम कर रही थी।

पश्चिम सिंहभूम की रहने वाली, सारंडा में थी सक्रिय
मोगड़ी होनहागा छोटानागरा थाना क्षेत्र के मारंगपोंगा गांव की निवासी है। बताया जा रहा है कि वह कुख्यात नक्सली कमांडर अनमोल उर्फ सुशांत के संपर्क में आने के बाद संगठन से जुड़ी थी।
इसके बाद वह सारंडा इलाके में सक्रिय हो गई और नक्सली गतिविधियों में भूमिका निभाने लगी। वह नए युवाओं को संगठन से जोड़ने और प्रशिक्षण देने जैसे कामों में भी शामिल थी।
कई घटनाओं में रही शामिल
सूत्रों के अनुसार, मोगड़ी इसी साल जनवरी में कुमडीह जंगल में हुई मुठभेड़ में भी मौजूद थी, जहां से वह अन्य नक्सलियों के साथ बच निकलने में सफल रही थी।
इसके अलावा उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले में विस्फोटक लूट से जुड़े मामले में भी उसकी संलिप्तता सामने आई है।
संगठन के भीतर शोषण का आरोप
आत्मसमर्पण के बाद मोगड़ी ने संगठन के अंदर की स्थिति को लेकर गंभीर खुलासे किए।
उसने बताया कि उसे मानसिक और शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ रहा था, जिससे वह काफी परेशान हो गई थी।
सरेंडर पॉलिसी से बदला फैसला
उड़ीसा सरकार की सरेंडर नीति से प्रेरित होकर मोगड़ी ने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
उसने गुप्त रूप से पुलिस से संपर्क साधा और अंततः राउरकेला में आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस का बयान
इस मामले में डीआईजी बृजेश कुमार राय ने कहा कि सरकार की नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को हर संभव सहायता और पुनर्वास की सुविधा दी जाएगी।
उन्होंने अन्य नक्सलियों से भी अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें।
क्या है संकेत?
यह आत्मसमर्पण नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की बढ़ती पकड़ और सरकारी नीतियों के प्रभाव को दर्शाता है।
साथ ही यह भी दिखाता है कि संगठन के अंदरूनी हालात से परेशान होकर कई सदस्य अब बाहर आने का रास्ता चुन रहे हैं।
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