चाईबासा: मागे पर्व पूजा स्थल साफ-सफाई को लेकर चाईबासा सदर प्रखंड अंतर्गत मतकमहातु गांव में एक महत्वपूर्ण विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी 27 फरवरी को मनाए जाने वाले मागे पर्व से पूर्व देशाउली-जयरा सहित सभी पवित्र पूजा स्थलों की साफ-सफाई सुनिश्चित करना था। ग्रामीणों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर स्वच्छता एवं आस्था संरक्षण का संकल्प लिया।
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आस्था केंद्रों की स्वच्छता पर जोर – मागे पर्व पूजा स्थल साफ-सफाई
बैठक में देशाउली फाउंडेशन के संस्थापक साधु हो बानरा ने कहा कि हो समुदाय की आस्था का केंद्र देशाउली-जयरा स्थल एवं अन्य पवित्र स्थान केवल पर्व-त्योहार के समय ही नहीं, बल्कि वर्षभर स्वच्छ और पवित्र बने रहने चाहिए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की नियमित देखरेख, विधि-व्यवस्था और सामुदायिक जिम्मेदारी तय करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों में भी श्रद्धा और सांस्कृतिक पहचान बरकरार रहे।
स्वच्छ गांव – सामुदायिक जिम्मेदारी
मागे पर्व पूजा स्थल साफ-सफाई अभियान के साथ-साथ ग्रामीण स्वच्छता पर भी विशेष बल दिया गया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि:
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प्लास्टिक पैकेट का उपयोग कम किया जाए
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पानी की बोतल एवं कांच की बोतल का उचित निपटान हो
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पूजा स्थलों के आसपास कूड़ा न फेंका जाए
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स्वच्छता के लिए सामूहिक श्रमदान किया जाए
ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक किया गया।
गूगल मैप में पंजीकरण – धार्मिक पहचान को डिजिटल स्वरूप
बैठक के उपरांत देशाउली स्थल का निरीक्षण किया गया। इस दौरान पवित्र स्थल को गूगल मैप में रजिस्टर भी किया गया, जिससे बाहरी श्रद्धालु एवं शोधकर्ता भी स्थल की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम सांस्कृतिक धरोहर को डिजिटल पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक की अध्यक्षता एवं उपस्थिति
बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण मुंडा धनुर्जय देवगम, दिऊरी चंद्र मोहन देवगम तथा कमारहातु ग्रामीण मुंडा बिरसा देवगम ने संयुक्त रूप से की।
मौके पर उपस्थित प्रमुख ग्रामीण एवं गणमान्य:
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नारायण देवगम
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गोपाल देवगम
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धर्मराज देवगम
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दीनबंधु देवगम
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सोनाराम देवगम
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सोमय देवगम
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सुरजा देवगम
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चाहत देवगम
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पप्पू देवगम
देशाउली फाउंडेशन की ओर से:
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कृष्णा देवगम
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रामदेव बोयपाई
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बोयो गागराई
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अन्य बुद्धिजीवी ग्रामीण
सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का संकल्प
मागे पर्व पूजा स्थल साफ-सफाई केवल एक स्वच्छता अभियान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का भी प्रतीक है। हो समुदाय के लिए देशाउली-जयरा जैसे स्थल धार्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व रखते हैं।
समुदाय ने यह भी संकल्प लिया कि भविष्य में ऐसे स्थलों की सुरक्षा, सौंदर्यीकरण और पहचान को लेकर निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
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