टोंटो (पश्चिमी सिंहभूम) |
पश्चिमी सिंहभूम जिले का टोंटो प्रखंड इन दिनों जंगली हाथियों के आतंक से जूझ रहा है। पिछले 6–7 दिनों से एक अकेला हाथी, जो अपने झुंड से बिछड़ चुका है, लगातार गांवों के आसपास विचरण कर रहा है। इस बिछड़े हुए हाथी के कारण क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद वन विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
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किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, जान-माल को भारी क्षति
बीते कई दिनों में टोंटो प्रखंड के विभिन्न गांवों में हाथियों ने खेतों में लगी फसलों को पूरी तरह रौंद डाला है। किसानों की महीनों की मेहनत पलभर में बर्बाद हो गई। इसके अलावा, हाथियों ने कई घरों में घुसकर अनाज नष्ट किया और कच्चे मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया। जान-माल के इस व्यापक नुकसान से ग्रामीण आर्थिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं।
प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ा आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचने के बजाय कार्यालयों तक सीमित हैं। प्रभावित क्षेत्रों का न तो नियमित दौरा किया जा रहा है और न ही हाथी को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस रणनीति अपनाई गई है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी रोष है कि जंगली जानवरों से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार द्वारा प्रतिवर्ष बजट का प्रावधान किया जाता है, लेकिन टोंटो प्रखंड के पीड़ित किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है।
ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए वन विभाग से ठोस कार्रवाई की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग तत्काल प्रभाव से हाथी की गतिविधियों पर नियंत्रण करे, ताकि किसी बड़ी अनहोनी से बचा जा सके। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भयावह हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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