1837-38 की ऐतिहासिक लड़ाई के शहीदों को किया गया नमन
Chaibasa (चाईबासा) : चाईबासा में वर्ष 1837-38 के दौरान ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हुई ऐतिहासिक लड़ाई एवं उससे जुड़ी वास्तविक तिथि 02 जनवरी को मानते हुए सेरेंगसिया घाटी के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर आदिवासी समाज के विभिन्न संगठनों ने अभियान चलाकर शहीदों को नमन किया।

सेरेंगसिया घाटी शहीद स्मारक स्थल पर हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के तहत सेरेंगसिया घाटी स्थित शहीद स्मारक स्थल पहुंचकर शहीद फोटो हो, नारा हो, देवी हो, बोड़ो हो, पांडुवा हो, केरसे हो, बुगनी हो सहित अन्य वीरों की प्रतिमाओं एवं स्मृति स्थलों पर पुष्प अर्पित किए गए। इस दौरान धूप व अगरबत्ती जलाकर शहीदों को सम्मान दिया गया।

‘हो’ और हिंदी भाषा में लगे शहीदों के सम्मान में नारे
कार्यक्रम के दौरान ‘हो’ भाषा एवं हिंदी भाषा में शहीदों के सम्मान में जोरदार नारे लगाए गए। पूरा वातावरण वीर शहीदों के बलिदान की स्मृति और आदिवासी स्वाभिमान की भावना से गूंज उठा।
02 जनवरी को ही श्रद्धांजलि देने की महासभा की अपील
इस अवसर पर आदिवासी ‘हो’ समाज महासभा सहित सभी इकाइयों की ओर से अपील की गई कि इतनी बड़ी ऐतिहासिक घटना में शहीद हुए वीरों को 02 जनवरी को ही श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए। महासभा ने 02 फरवरी से जुड़ी तिथि में हुई त्रुटियों को सुधारने की मांग भी उठाई।
नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने पर जोर
महासभा का मानना है कि सेरेंगसिया घाटी की ऐतिहासिक घटना पर हुए शोध और वास्तविक इतिहास की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है, ताकि आदिवासी समाज के संघर्ष और बलिदान को सही संदर्भ में समझा जा सके।

बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी और सदस्य रहे मौजूद
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में महासभा के उपाध्यक्ष बामिया बारी, महासचिव सोमा कोड़ा, सेवानिवृत संगठन अध्यक्ष रामाय पुरती, सचिव चंद्रमोहन बिरूवा, युवा महासभा अध्यक्ष इपिल सामड, महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम, जिलाध्यक्ष शेरसिंह बिरूवा, सचिव ओएबन हेम्ब्रम, सदस्य सिकंदर तिरिया, टोन्टो प्रखंड अध्यक्ष विष्टुम हेस्सा सहित कृष्णा तोपनो, ज्योति देवगम, जगदीश हेम्ब्रम, पुष्पा हेम्ब्रम, सुशीला सिंकू, करन होनहागा, थॉमस राज बिरूवा, विश्वजीत बिरुवा, पाईकिराय हेम्ब्रम, राकेश हेम्ब्रम समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।
शहीदों के बलिदान को सही तिथि के साथ सम्मान
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सेरेंगसिया घाटी के शहीदों के बलिदान को सही ऐतिहासिक तिथि के साथ सम्मान देना और समाज के युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से जागरूक करना रहा।


