गिट्टी क्रशर व खदान बंद कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों का फैसला, मजदूरों को फुल एंड फाइनल भुगतान की उठी मांग

खदान और क्रशर

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के तांतनगर प्रखंड क्षेत्र में संचालित गिट्टी क्रशर और खदान को बंद कराने तथा मजदूरों को बकाया भुगतान दिलाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने संयुक्त ग्राम सभा कर कड़ा निर्णय लिया है। इस संबंध में ग्रामीणों और आदिवासी किसान मजदूर पार्टी की ओर से उपायुक्त, चाईबासा को ज्ञापन सौंपा गया है।

ज्ञापन में बताया गया है कि 22 फरवरी 2026 को ग्राम पटवाहाड़ में संयुक्त ग्राम सभा आयोजित कर क्षेत्र के पटवाहाड़, पीऊड़ा, कडाजामदा और जगन्नाथपुर प्रखंड अंतर्गत विधिया गांव के ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

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खदान और क्रशर

लीज समाप्त, फिर भी समस्याएं बरकरार

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में संचालित गिट्टी क्रशर व खदान की लीज समाप्त हो चुकी है, लेकिन खदान और क्रशर से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। खदान में काम करने वाले मजदूरों को सरकार द्वारा तय मजदूरी दर के अनुसार भुगतान नहीं किया गया है। साथ ही उन्हें पहचान पत्र और पीएफ का लाभ भी नहीं दिया गया।

ग्रामीण सड़क और घरों को नुकसान

ग्राम सभा में यह भी आरोप लगाया गया कि भारी वाहनों के आवागमन से ग्रामीण सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। वहीं खदान में ब्लास्टिंग के कारण कई घरों में दरारें पड़ गई हैं। पूर्व में मरम्मत के लिए कुछ मुआवजा दिया गया था, लेकिन वर्ष 2019 के बाद से यह बंद हो गया है।

प्रदूषण और खेती पर असर

ग्रामीणों ने कंपनी पर प्रदूषण नियंत्रण में लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पूरे क्षेत्र में धूल और पत्थर का डस्ट फैलने से लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है और कृषि भूमि भी बर्बाद हो रही है। जंगल और आदिवासी खेती योग्य जमीन को भी नुकसान पहुंचा है।

ग्राम सभा के प्रमुख निर्णय

ग्राम सभा में तय किया गया कि भविष्य में किसी भी स्थिति में खदान को दोबारा लीज नहीं दी जाएगी। यदि फर्जी ग्राम सभा कर खनन शुरू करने की कोशिश की गई तो इसका विरोध किया जाएगा।

इसके अलावा ब्लास्टिंग से प्रभावित घरों के नुकसान की भरपाई, मजदूरों को फुल एंड फाइनल भुगतान, प्रभावित जमीन को खेती योग्य बनाने और बकाया मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। साथ ही बंद खदान को समतल करने तक कंपनी के वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, कोल्हान आयुक्त और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी ज्ञापन भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

इस संबंध में आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष जॉन मिरन मुंडा ने कहा कि जब तक मजदूरों और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

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