महिला श्रमिक आंदोलन गुवा: अनदेखी के विरोध में यूनियन की चेतावनी

महिला श्रमिक आंदोलन गुवा

महिला श्रमिक आंदोलन गुवा के तहत झारखंड महिला श्रमिक संघ यूनियन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें महिला श्रमिकों की लगातार हो रही अनदेखी को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। बैठक में शामिल महिला श्रमिकों ने एक स्वर में कहा कि गुवा क्षेत्र में कार्यरत प्रबंधन और ठेकेदारों की नीतियों के कारण महिलाओं को उनके अधिकारों और अवसरों से वंचित किया जा रहा है।

बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया कि गुवा सेल प्रबंधन द्वारा किसी भी कार्य योजना या प्रस्ताव में महिला श्रमिकों की भागीदारी को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। जबकि भारत सरकार की नीतियों के अनुसार महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, इसके बावजूद कार्यस्थल पर महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। यह स्थिति महिला श्रमिकों के अधिकारों के साथ अन्याय के रूप में देखी जा रही है।

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आंदोलन गुवा

यूनियन के सदस्यों ने कहा कि महिला श्रमिक न केवल कार्यस्थल पर सक्रिय भूमिका निभाती हैं, बल्कि वे आर्थिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इसके बावजूद उन्हें निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा जाना गंभीर चिंता का विषय है। बैठक में यह भी कहा गया कि यदि समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि जल्द ही गुवा सेल प्रबंधन एवं संबंधित ठेकेदारों के साथ एक औपचारिक बैठक की जाएगी। इस बैठक में महिला श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की मांग को प्रमुखता से रखा जाएगा। यूनियन ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगी।

बैठक में यूनियन की अध्यक्ष गीता देवी और सचिव रजनी पिंगुवा ने महिला श्रमिकों से एकजुट रहने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठित प्रयासों से ही महिलाओं को उनका हक मिल सकता है और कार्यस्थल पर समान अवसर सुनिश्चित किया जा सकता है।

इस अवसर पर लता कर्मकार, सुनीता समद, जानो चातर, कविता दास, ममता देवी, महादेवी सिन्हा, संतोषी महाकुड़ और रानी गोप सहित कई महिला सदस्य उपस्थित रहीं। सभी ने एकजुट होकर महिला अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

महिला श्रमिक आंदोलन गुवा यह संकेत देता है कि अब महिला श्रमिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं और किसी भी प्रकार की अनदेखी को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर प्रबंधन का रुख और यूनियन की रणनीति महत्वपूर्ण साबित होगी।

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