मजदूर अपनी कई मांगों को लेकर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेतृत्व में एकजुट हुए थे। उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक उनकी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।
मामले की शुरुआत तब हुई जब सरायकेला विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी प्रेम मार्डी ने मजदूरों की ओर से कंपनी प्रबंधन को मांगपत्र सौंपा था। इसमें साफ कहा गया था कि 9 दिसंबर तक सकारात्मक पहल नहीं होने पर 10 दिसंबर से हड़ताल अनिवार्य होगी। तय समयसीमा पूरी होने के बाद भी कोई निर्णय नहीं होने पर मजदूर यूनिट में काम छोड़कर हड़ताल पर बैठ गए, जिससे उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया।
हालात बिगड़ते देख प्रबंधन और जिला प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद प्रबंधन, मजदूर प्रतिनिधियों और जेएलकेएम पदाधिकारियों के बीच त्रिस्तरीय वार्ता की गई। बातचीत में मजदूरों की दो प्रमुख मांगें—सभी मजदूरों को पहचान पत्र उपलब्ध कराना और दो बर्खास्त श्रमिकों को काम पर पुनः बहाल करना—कंपनी ने स्वीकार कर लीं। न्यूनतम वेतन को लेकर 11 सदस्यीय समिति बनाई गई है, जो एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी। लिखित आश्वासन मिलने के बाद मजदूरों ने हड़ताल समाप्त कर दी और यूनिट में कामकाज सामान्य रूप से शुरू हो गया।