राजाबुरू खदान में स्थानीय बहाली को लेकर 11 गांवों की विशाल रैली, 500 रोजगार की मांग

गुवा संवाददाता। गुवा क्षेत्र स्थित सेल में प्रस्तावित राजाबुरू खदान को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया। खदान से प्रभावित 11 गांव—कासिया पेचा, जोजोगुटू, राजाबेड़ा, घाटकुड़ी, गंगदा, बाईहातु, तिंतलिघाट, लेम्बेरे, सोनापी, बाड़ुईया एवं छोटानागरा—के लगभग 300 मुंडा, मानकी, डाकुआ एवं ग्रामीणों ने विशाल रैली निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया।

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रैली का नेतृत्व काशिया पेचा गांव के मुंडा मांता सुरीन की अध्यक्षता में किया गया। ग्रामीण अपने पारंपरिक हथियारों के साथ कैलाश नगर से जुलूस की शक्ल में निकले, जो गुवा बाजार होते हुए सेल के जनरल ऑफिस पहुंचा। वहां प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए प्रबंधन को मांग पत्र सौंपा।

राजाबुरू

500 स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग

ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने मांग की कि प्रस्तावित राजाबुरू खदान में प्रभावित गांवों के कम से कम 500 स्थानीय बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार दिया जाए। साथ ही राज्य सरकार के प्रावधानों के अनुसार 75% स्थायी स्थानीय (Local Residential Certificate) के आधार पर बहाली सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।

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ग्रामीणों ने यह भी मांग रखी कि कुल बहाली में 40% महिलाओं को रोजगार दिया जाए, ताकि खदान क्षेत्र के परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

विकास नहीं होने का आरोप

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गुवा स्थित सेल खदान वर्ष 1919-20 से संचालित है, लेकिन 100 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रभावित गांवों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क एवं पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है।

उन्होंने बहाली प्रक्रिया में मनमानी और कथित लेन-देन के आधार पर नियुक्ति किए जाने का भी आरोप लगाया।

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पेरिफेरल डेवलपमेंट योजना लागू करने की मांग

ग्रामीणों ने Steel Authority of India Limited (सेल) प्रबंधन से मांग की कि पेरिफेरल डेवलपमेंट योजना के तहत खदान से सटे गांवों में विकास कार्य और स्थायी रोजगार सुनिश्चित किया जाए।

साथ ही स्पष्ट कहा गया कि राजाबुरू खदान खोलने से पहले स्थानीय बहाली को लेकर लिखित एवं तर्कसंगत समझौता किया जाए।

पेसा कानून और संवैधानिक अधिकार का हवाला

आंदोलनकारियों ने पेसा कानून तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार की बात रखी। उनका कहना था कि प्राकृतिक संसाधनों पर पहला हक स्थानीय निवासियों का होना चाहिए।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके तहत गुवा सेल की मुख्य सड़क एवं खदान क्षेत्र में चक्का जाम किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

अंत में मुंडा, मानकी एवं ग्रामीण प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से मांग पत्र प्रबंधन को सौंपा।

http://गुवा में सीटू एवं संयुक्त यूनियन का सड़क जाम, भारत बंद का समर्थन कर श्रम कानूनों के विरोध में प्रदर्शन

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