महाशिवरात्रि बाबा बैद्यनाथ धाम: आस्था, परंपरा और दिव्यता का संगम

महाशिवरात्रि

देवघर: महाशिवरात्रि बाबा बैद्यनाथ धाम में इस वर्ष भी अत्यंत श्रद्धा, वैदिक विधि और प्राचीन परंपराओं के साथ मनाई जा रही है। झारखंड के देवघर स्थित इस पावन ज्योतिर्लिंग धाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर पंचशूल पूजा, शिखर पुनर्स्थापना और बाबा-पार्वती गठबंधन की ऐतिहासिक रस्म विधिवत संपन्न हुई। मंदिर परिसर भक्तों के “बोल बम” और हर-हर महादेव के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

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पंचशूलों की विशेष पूजा व शुद्धिकरण

महाशिवरात्रि से पूर्व परंपरा अनुसार मंदिर परिसर के सभी देवालयों के शिखरों पर स्थापित पंचशूलों को उतारा गया। प्रधान पुजारी सह सरदार पंडा गुलाबनंद ओझा द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ षोडषोपचार विधि से पंचशूलों का शुद्धिकरण और पूजन किया गया।

पूजा के उपरांत मंदिर प्रांगण स्थित सभी 22 मंदिरों के शिखरों पर पंचशूलों को पुनः स्थापित किया गया। यह प्रक्रिया धर्म, ऊर्जा और मंदिर की आध्यात्मिक सुरक्षा से जुड़ी मानी जाती है।

महाशिवरात्रि बाबा बैद्यनाथ धाम की प्राचीन परंपरा

महाशिवरात्रि बाबा बैद्यनाथ धाम की यह परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। हर वर्ष:

  • पंचशूल उतारे जाते हैं

  • उनकी साफ-सफाई होती है

  • वैदिक पूजा की जाती है

  • पुनर्स्थापना संपन्न होती है

मंगलवार को बाबा बैद्यनाथ एवं पार्वती मंदिर के शिखरों से पंचशूल उतारे गए थे, जबकि अन्य मंदिरों के पंचशूल पहले ही उतारे जा चुके थे।

बाबा-पार्वती का पावन गठबंधन

पंचशूल पूजा के बाद बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती मंदिर के पंचशूलों का पारंपरिक मिलन कराया गया। इसे “गठबंधन” की रस्म कहा जाता है, जो शिव-शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है।

भक्त इस दृश्य को अत्यंत शुभ मानते हैं और मान्यता है कि इसके दर्शन से वैवाहिक सुख एवं पारिवारिक समृद्धि की प्राप्ति होती है।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़

महाशिवरात्रि के अवसर पर धाम में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। पंचशूलों के दर्शन और स्पर्श के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।

भक्तों ने:

  • मस्तक सटाकर पंचशूलों को नमन किया

  • जलार्पण किया

  • बोल बम के जयकारे लगाए

पूरा मंदिर परिसर भक्ति और आस्था से सराबोर दिखा।

महाशिवरात्रि पूजा कार्यक्रम

मंदिर प्रशासन द्वारा जारी कार्यक्रम अनुसार:

  • 🕒 प्रातः 3:15 बजे — पट खुलेंगे

  • 🪔 विशेष पूजा संपन्न होगी

  • 🕓 4:25 बजे — आम श्रद्धालुओं के लिए पट खुलेंगे

  • 💧 4:00–6:00 बजे — जलार्पण

  • 📿 रात्रि — चार प्रहर पूजा

  • 🌅 अगले दिन 8:00 बजे — नियमित पूजा प्रारंभ

अनुमान है कि इस अवसर पर 2 लाख से अधिक श्रद्धालु जलार्पण करेंगे।

आस्था का अद्भुत महासंगम

महाशिवरात्रि बाबा बैद्यनाथ धाम में केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शिव-भक्ति, परंपरा, ऊर्जा और आध्यात्मिक एकता का विराट उत्सव है। पंचशूल पूजा और बाबा-पार्वती गठबंधन जैसी परंपराएँ इस धाम की विशिष्ट पहचान हैं।

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