महाशिवरात्रि : उत्तराखंड के त्रियुगी नारायण मंदिर में हुई थी शिव-पार्वती की शादी

Delhi :- रुद्रप्रयाग जिले की केदारघाटी में देश दुनिया में मशहूर त्रियुगीनारायण मंदिर स्थित है। भोलेनाथ ने यहीं पर विवाह रचाया था। मंदिर वैसे तो भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन शिव-पार्वती के विवाह स्थल नाम से ही इसे जाना जाता है।

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साथ ही श्रद्धालु मंदिर में पिंडदान और काल सर्प दोष के निदान के लिए भी पहुंचते हैं। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा के साथ-साथ माता लक्ष्मी, सरस्वती व अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं। साथ ही गर्भ गृह परिसर के नजदीक सदियों से एक अग्नि कुंड जल रहा है. जिसे ‘अखंड धुनी’ के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर प्रांगण में चार कुंड सरस्वती कुंड, रुद्र कुंड, विष्णु कुंड और ब्रह्म कुंड स्थित हैं।

कहा जाता है कि शिव और पार्वती की शादी में यहां पर पार्वती के भाई भी मौजूद थे। वहीं, भगवान ब्रह्मा ने पुजारी के रूप में दोनों का विवाह करवाया था। विष्णु की नाभि से सरस्वती जलधारा बनने की वजह से 3 कुंड बने थे, जिसमें देवताओं ने स्नान किया था। इस मंदिर में विवाह के लिए मन्नत मांगने पर शुभ फल मिलते हैं। इस मंदिर में पूजा करने के बाद राख ले जाने की भी प्रथा है। ऐसा करने पर शादी में आ रही सभी मुश्किलें दूर हो जाती हैं। यही कारण है कि बहुत से लोग इस मंदिर में जाकर शादी भी करते हैं।

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