सरायकेला। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन (एमएमडीआर) संशोधन बिल के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकर्ताओं ने सरायकेला प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में एक दिवसीय जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आह्वान पर आयोजित इस राज्यव्यापी आंदोलन के तहत प्रखंड मुख्यालय में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में महिलाओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोला और जमकर नारेबाजी की।

धरने को संबोधित करते हुए सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष सह झामुमो नेता मनोज चौधरी ने कहा कि एमएमडीआर संशोधन बिल पूरी तरह से ‘काला कानून’ है, जो देश के संघीय ढांचे और संविधान की मूल भावना पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड की हेमंत सरकार जनकल्याणकारी नीतियों से जनता का विश्वास जीत रही है, जिसे देखकर केंद्र सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की साजिश रच रही है। भाजपा अश्वमेध यज्ञ की तरह पूरे देश में चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का काम कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी संवैधानिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन चलाकर केंद्र को यह कानून वापस लेने पर विवश करेगी।
वहीं, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सह झामुमो नेत्री शकुंतला महाली ने कहा कि यह आंदोलन आज प्रखंड स्तर से शुरू हुआ है और यदि केंद्र सरकार ने इस काले कानून को निरस्त नहीं किया, तो झामुमो कार्यकर्ता दिल्ली तक उलगुलान करेंगे। उन्होंने कहा कि यह विधेयक झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा को छीनने की नीयत से लाया गया है। महिलाओं की भारी मौजूदगी पर उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट की सबसे पहली मार परिवारों और महिलाओं पर पड़ती है, इसलिए आज महिलाएं चूल्हा-चौका छोड़कर अपने हक और अधिकार की रक्षा के लिए सड़क पर उतरी हैं।








