बाइक बीमा दावा खारिज करना पड़ा भारी, Bajaj Allianz को उपभोक्ता आयोग ने लगाई फटकार, बीमा कंपनी को 32,360 रुपये दावा राशि के साथ 10 हजार मानसिक क्षतिपूर्ति और 5 हजार मुकदमा खर्च देने का आदेश

बजाज एलियांज बीमा दावा चाईबासा

Chaibasa (चाईबासा) : बाइक दुर्घटना के बाद बीमा दावा खारिज करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पश्चिमी सिंहभूम ने बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना है। आयोग ने शिकायतकर्ता मनोज कुमार यादव के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 32,360 रुपये की दावा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

इसके अलावा कंपनी को मानसिक पीड़ा एवं परेशानी के लिए 10,000 रुपये तथा मुकदमा खर्च के रूप में 5,000 रुपये भी देने होंगे। आयोग ने पूरी राशि का भुगतान आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर करने को कहा है। तय समय में भुगतान नहीं होने पर 32,360 रुपये की दावा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।

बीमा कंपनी को उपभोक्ता आयोग की फटकार, पत्नी के इलाज के 82,572 रुपये चुकाने का आदेश चाईबासा में SBI General Insurance के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का फैसला, मानसिक परेशानी के लिए 40 हजार और मुकदमा खर्च के 10 हजार रुपये भी देने होंगे

बाइक दुर्घटना के बाद शुरू हुआ विवाद

यह मामला सी.सी. केस संख्या 29/2025 से संबंधित है। मामले की संस्थापन तिथि 18 जुलाई 2025, अंतिम सुनवाई 22 अगस्त 2026 और फैसले की घोषणा 2 सितंबर 2026 को हुई।

शिकायतकर्ता मनोज कुमार यादव, पिता कालीपद यादव, बांदा कुंडियाधार, हाटगम्हरिया, पश्चिमी सिंहभूम के निवासी हैं। उन्होंने अपनी रॉयल एनफील्ड बाइक का बीमा बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। संबंधित पॉलिसी 9 सितंबर 2024 से 8 सितंबर 2025 तक प्रभावी थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार दुर्घटना में बाइक क्षतिग्रस्त होने के बाद उन्होंने बीमा कंपनी और रॉयल एनफील्ड के अधिकृत डीलर एसपी वेंचर्स, चाईबासा से संपर्क किया। वाहन की मरम्मत के लिए अनुमानित खर्च भी तैयार किया गया, लेकिन बीमा कंपनी की ओर से इसकी स्वीकृति नहीं दी गई।

34 दिन बाद बीमा कंपनी को मिली दुर्घटना की सूचना

बीमा कंपनी ने आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दुर्घटना 26 फरवरी 2025 को हुई थी, जबकि कंपनी को इसकी जानकारी 1 अप्रैल 2025 को दी गई। कंपनी के अनुसार दुर्घटना की सूचना मिलने में करीब 34 दिनों की देरी हुई थी।

बीमा कंपनी ने शिकायतकर्ता से देरी का कारण बताने के साथ ड्राइविंग लाइसेंस और दुर्घटनाग्रस्त वाहन की तस्वीरें उपलब्ध कराने को कहा। कंपनी का कहना था कि इस संबंध में 18 अप्रैल, 29 अप्रैल और 9 मई 2025 को पत्र एवं रिमाइंडर भेजे गए, लेकिन आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद 20 मई 2025 को बीमा दावा खारिज कर दिया गया।

सर्वेयर ने 32,360 रुपये की क्षति का आकलन किया

मामले में बीमा कंपनी की ओर से नियुक्त सर्वेयर ने क्षतिग्रस्त बाइक का निरीक्षण किया था। सर्वे रिपोर्ट में वाहन की क्षति का अनुमान 32,360 रुपये लगाया गया।

कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि वाहन में दुर्घटना से पहले की कुछ क्षतियों को भी बीमा दावे में शामिल किए जाने की कोशिश की गई। इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित बिंदुओं को भी कंपनी ने अपने बचाव का आधार बनाया।

दुर्घटना की तारीख को लेकर रिकॉर्ड में अंतर

सुनवाई के दौरान आयोग के सामने मामले से जुड़े दस्तावेजों में कुछ महत्वपूर्ण विसंगतियां भी सामने आईं। शिकायतकर्ता के शपथपत्र में दुर्घटना की तारीख 24 दिसंबर 2024 बताई गई, जबकि बीमा कंपनी के रिकॉर्ड में दुर्घटना की तारीख 26 फरवरी 2025 दर्ज थी।

ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी दोनों पक्षों की अलग-अलग दलीलें सामने आईं। इसके साथ ही सर्वे रिपोर्ट की तारीख से जुड़े रिकॉर्ड में भी आयोग ने अंतर पाया।

डीलर एसपी वेंचर्स को आयोग से राहत

मामले में रॉयल एनफील्ड के अधिकृत डीलर एसपी वेंचर्स को आयोग ने राहत दी है। आयोग ने माना कि डीलर के स्तर पर सेवा में कमी साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, इसलिए उसके खिलाफ शिकायत खारिज कर दी गई।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बीमा कंपनी द्वारा मरम्मत खर्च की स्वीकृति नहीं दिए जाने से डीलर को वाहन की मरम्मत अपने खर्च पर करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। खासकर तब, जब शिकायतकर्ता की ओर से स्वयं मरम्मत खर्च वहन करने की तैयारी का ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं था।

बीमा कंपनी को देना होगा दावा और क्षतिपूर्ति

बीमा कंपनी के मामले में आयोग ने शिकायत को स्वीकार करते हुए सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार पाया। इसके बाद शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बजाज एलियांज को 32,360 रुपये बीमा दावा, 10,000 रुपये मानसिक पीड़ा एवं परेशानी और 5,000 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया गया।

45 दिन की समय सीमा, इसके बाद ब्याज

आयोग ने आदेश दिया है कि निर्धारित राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाए। ऐसा नहीं होने पर 32,360 रुपये की दावा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।फैसले से यह संदेश भी सामने आया है कि बीमा कंपनियां दावा प्रक्रिया में दस्तावेजों और जांच के आधार पर निर्णय ले सकती हैं, लेकिन उपभोक्ता के दावे पर कार्रवाई करते समय प्रक्रिया को पारदर्शी और उचित तरीके से पूरा करना जरूरी है।

http://चाईबासा: आधी रात खाते से UPI के जरिए गायब हुए ₹48,765, Canara Bank को उपभोक्ता आयोग का झटका, धनेश कुमार की शिकायत पर बैंक को रकम लौटाने के साथ ₹25 हजार मुआवजा और मुकदमा खर्च देने का आदेश

 

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बजाज एलियांज बीमा दावा चाईबासा

बीमा कंपनी को उपभोक्ता आयोग की फटकार, पत्नी के इलाज के 82,572 रुपये चुकाने का आदेश चाईबासा में SBI General Insurance के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का फैसला, मानसिक परेशानी के लिए 40 हजार और मुकदमा खर्च के 10 हजार रुपये भी देने होंगे