चाईबासा। दिल्ली के सत्य निकेतन में जर्जर भवन गिरने की घटना के बाद पुराने और असुरक्षित भवनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के जर्जर भवन को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। आयोग ने भवन की खराब स्थिति को देखते हुए उपायुक्त से तत्काल तकनीकी जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा के अध्यक्ष की ओर से 2 सितंबर 2026 को उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी को पत्रांक 86 भेजा गया है। पत्र में आयोग के जर्जर भवन की मरम्मत और जीर्णोद्धार कराने अथवा आवश्यकता पड़ने पर आयोग के लिए वैकल्पिक भवन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।

पहले ही गिर चुका है भवन का छज्जा
आयोग ने अपने पत्र में भवन की मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। बताया गया है कि भवन की छत का एक हिस्सा/छज्जा पहले ही गिर चुका है। हालांकि उस समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन घटना ने भवन की संरचनात्मक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आयोग के अनुसार, भवन की जर्जर स्थिति के कारण यहां कार्यरत पदाधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा अधिवक्ताओं, पक्षकारों तथा विभिन्न मामलों की सुनवाई के लिए पहुंचने वाले आम लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है।
तकनीकी जांच कराने की मांग
आयोग ने उपायुक्त से आग्रह किया है कि भवन निर्माण विभाग के अभियंता से भवन का स्थलीय निरीक्षण और तकनीकी जांच कराई जाए। जांच के बाद भवन की वास्तविक स्थिति का आकलन करते हुए आवश्यक मरम्मत या जीर्णोद्धार का काम कराया जाए।
यदि भवन की स्थिति ऐसी पाई जाती है कि उसमें न्यायिक कार्य जारी रखना सुरक्षित नहीं है, तो आयोग के लिए वैकल्पिक भवन उपलब्ध कराने की मांग भी पत्र में की गई है।
आयोग ने आशंका जताई है कि भवन की वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में समय रहते आवश्यक कदम उठाना जरूरी है।

दिल्ली हादसे के बाद बढ़ी चिंता
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में 6 सितंबर 2026 को बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना ने पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में मौतों की सूचना सामने आई और राहत-बचाव अभियान चलाया गया। घटना के बाद भवन की स्थिति और वहां चल रहे निर्माण संबंधी गतिविधियों समेत विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है।
दिल्ली की घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जर्जर भवनों की समय रहते तकनीकी जांच और सुरक्षा ऑडिट क्यों नहीं कराया जाता। ऐसे में चाईबासा जिला उपभोक्ता आयोग की ओर से हादसे से पहले प्रशासन को पत्र लिखकर भवन की स्थिति से अवगत कराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रोजाना पहुंचते हैं अधिकारी, कर्मचारी और आम लोग
जिला उपभोक्ता आयोग के भवन में नियमित रूप से न्यायिक कार्य संचालित होते हैं। यहां आयोग के पदाधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं, जबकि अपने मामलों की सुनवाई के लिए उपभोक्ता और अन्य पक्षकार भी पहुंचते हैं। अधिवक्ताओं की भी नियमित आवाजाही रहती है।
ऐसे में भवन की संरचनात्मक स्थिति खराब होने पर किसी भी तरह की दुर्घटना का खतरा केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वहां आने वाले आम लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
आयोग ने अपने पूर्व पत्राचार का भी हवाला दिया है। साथ ही जर्जर भवन से संबंधित फोटोग्राफ, पूर्व में भेजे गए पत्र और प्रकाशित समाचार की प्रति भी उपायुक्त को भेजे गए पत्र के साथ संलग्न की गई है।
हादसे के बाद कार्रवाई या पहले ही होगी सुरक्षा व्यवस्था?
चाईबासा जिला उपभोक्ता आयोग ने प्रशासन के समक्ष समस्या उस समय रखी है, जब अभी किसी बड़े हादसे की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है। ऐसे में अब निगाह प्रशासन और भवन निर्माण विभाग की कार्रवाई पर है।
मुख्य सवाल यह है कि तकनीकी टीम भवन का निरीक्षण कब करेगी और जांच के बाद क्या निर्णय लिया जाएगा। मरम्मत और जीर्णोद्धार संभव है या आयोग को सुरक्षित वैकल्पिक भवन उपलब्ध कराया जाएगा, यह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल आयोग की मांग का उद्देश्य साफ है—किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते भवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।








