मुकुंद रूंगटा बोले— सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत ही दुर्गोत्सव की असली पहचान
Chaibasa (चाईबासा) : पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा के आमला टोला में 156 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक दुर्गापूजा परंपरा एक बार फिर श्रद्धा और उल्लास के साथ जीवंत हो उठी। शुक्रवार को महाषष्ठी के पावन अवसर पर आमला टोला सार्वजनिन दुर्गा पूजा समिति के दुर्गा मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मां दुर्गा के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। इसके साथ ही क्षेत्र में दुर्गोत्सव की रौनक बढ़ गई।
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वर्ष 1870 में स्थापित आमला टोला सार्वजनिन दुर्गा पूजा समिति अपनी ऐतिहासिक परंपरा, विशिष्ट पूजा पद्धति और सामुदायिक सहभागिता के लिए जानी जाती है। समिति के मुख्य संरक्षक, प्रख्यात उद्योगपति एवं समाजसेवी मुकुंद रूंगटा ने विधिवत उद्घाटन कर पूजा महोत्सव का शुभारंभ किया। मां दुर्गा के पट खुलते ही मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर परिवार और समाज की सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है दुर्गोत्सव : मुकुंद रूंगटा
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुकुंद रूंगटा ने श्रद्धालुओं और नगरवासियों को दुर्गापूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दुर्गापूजा महज एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन लोगों को आपस में जोड़ते हैं। इससे प्रेम, भाईचारे और आपसी सद्भाव को मजबूती मिलती है। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलता है।
मुकुंद रूंगटा ने आमला टोला सार्वजनिन दुर्गा पूजा समिति की ऐतिहासिक परंपरा और सदस्यों की सामूहिक भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं को पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ आगे बढ़ाना सराहनीय है। यह परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ सामाजिक एकजुटता को भी बनाए रखती है।
उन्होंने मां दुर्गा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की। साथ ही नगरवासियों से आपसी सद्भाव और सौहार्द के साथ दुर्गोत्सव मनाने की अपील की।
चित्रांकन प्रतियोगिता का भी हुआ आयोजन
पट उद्घाटन समारोह के बाद समिति की ओर से चित्रांकन प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। दुर्गोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इस तरह की गतिविधियां आयोजन को सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी खास बनाती हैं।
कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष तपन कुमार मित्रा, उपाध्यक्ष गोपाल चटर्जी, सचिव प्रभाष सरकार, संयुक्त सचिव त्रिशानु राय सहित भरत रूंगटा, गौतम सरकार, अनूप मुखर्जी, देब नाथ सरकार, रोहित रूंगटा, कार्तिक सरकार, कृषनेन्दु राय, गौतम रूंगटा, निरुपम मित्रा, सुशांत चटर्जी, मानिक घोष, कंचन राय, राज कुमार कुईला, विश्वनाथ राय, दीपक सेनगुप्ता, सायन सरकार, अरुण बनर्जी, पिंटू घोष, स्वाधीन बनर्जी और गणेश सरकार समेत समिति के अन्य सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।
आमला टोला की यह ऐतिहासिक दुर्गापूजा परंपरा धार्मिक आस्था के साथ चाईबासा की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता की पहचान बनी हुई है।
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