आदित्यपुर टुसू मेला के अवसर पर फुटबॉल मैदान स्थित दिंण्डली सार्वजनिक टुसू मेला कमेटी द्वारा एक दिवसीय भव्य टुसू मेला का आयोजन किया गया। इस लोक सांस्कृतिक आयोजन में आदित्यपुर, गम्हरिया, जमशेदपुर सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
फुटबॉल मैदान में आयोजित आदित्यपुर टुसू मेला में सुबह से ही टुसू प्रतिमाओं का आगमन शुरू हो गया। विभिन्न गांवों और क्षेत्रों से लोग अपने पारंपरिक परिधानों में टुसू प्रतिमाएं और चौडल लेकर पहुंचे, जिससे पूरा मेला स्थल झारखंडी लोक संस्कृति के रंग में रंग गया।
झूमर और कुड़मली गीतों ने बांधा समां
मेले में प्रस्तुत किए गए झूमर नृत्य और कुड़मली लोक गीतों ने दर्शकों को खूब झुमाया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुति पर लोग खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए।
आदित्यपुर टुसू मेला में लोक कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ गीत-संगीत प्रस्तुत कर माहौल को जीवंत बना दिया।
जमशेदपुर व गम्हरिया से भी पहुंचीं प्रतिमाएं
आदित्यपुर के अलावा गम्हरिया और जमशेदपुर क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में टुसू प्रतिमाएं और चौडल मेला स्थल पर लाई गईं। इससे मेला और अधिक भव्य व आकर्षक बन गया।
संस्कृति संरक्षण का संदेश
इस अवसर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेता लालटू महतो ने कहा कि
“आदित्यपुर टुसू मेला जैसे आयोजन का मुख्य उद्देश्य झारखंडी लोक कला और संस्कृति को बचाए रखना है। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी बेहद जरूरी है।”
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सांस्कृतिक एकता और पहचान मजबूत होती है।
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे।
मुख्य रूप से उपस्थित रहे—
-
विश्व हिंदू परिषद जिला अध्यक्ष डॉ. जे.एन. दास
-
भाजपा नेता बास्को बेसरा
-
पूर्व वार्ड पार्षद राजरानी महतो
-
जुली महतो
-
भाजपा नेत्री सारथी महतो
-
शीला पॉल
-
आयोजन समिति से रीतेन महतो
-
गुरजीत सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति
लोक परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक
आदित्यपुर टुसू मेला केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि यह झारखंड की लोक परंपराओं, आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक है। टुसू पर्व के माध्यम से ग्रामीण व शहरी समाज एक साथ जुड़ता है और अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखता है।








