Adityapur (आदित्यपुर) : आदित्यपुर एम टाइप स्थित प्रवीण सिंह सेवा संस्थान की ओर से आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव का समापन विजयादशमी के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन के साथ हुआ। 11 दिनों तक भव्य पंडाल में विराजमान रहीं मां दुर्गा को विदाई देने के लिए निकाले गए विशाल विसर्जन जुलूस में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और भक्ति देखने को मिली। ढोल-नगाड़ों, आकर्षक झांकियों और जयकारों के बीच भक्तों ने मां दुर्गा को नम आंखों से विदाई दी।
विसर्जन से पहले आदित्यपुर कॉलोनी के श्रद्धालुओं और प्रवीण सिंह सेवा संस्थान के सदस्यों ने विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा को वाहन पर विराजमान कराया। इसके बाद भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ महिलाओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे रास्ते भक्त मां दुर्गा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। माहौल भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष मां के पुनः आगमन की कामना की।

विसर्जन जुलूस का नेतृत्व आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर सह प्रवीण सिंह सेवा संस्थान के अध्यक्ष अंकुर सिंह कर रहे थे। इस दौरान संस्थान के संरक्षक एवं पूर्व विधायक अरविंद सिंह सहित पूजा समिति के पदाधिकारी और सक्रिय सदस्य मौजूद रहे। सभी ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के प्रति आभार जताया।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जुलूस आदित्यपुर कॉलोनी से होते हुए जय प्रकाश उद्यान के समीप खरकई नदी तट पहुंचा, जहां मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन से पहले पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद भक्तों ने भावुक माहौल में मां को विदाई दी। मां दुर्गा के विसर्जन के साथ ही पूजा महोत्सव का समापन हुआ।
11 दिनों में लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
प्रवीण सिंह सेवा संस्थान की ओर से आयोजित दुर्गा पूजा के दौरान बीते 11 दिनों में जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी राज्यों पश्चिम बंगाल और ओडिशा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आयोजकों के अनुसार, लाखों भक्तों ने भव्य पंडाल में मां दुर्गा के दर्शन किए।
11 अक्टूबर की शाम पंडाल के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे। इसके बाद लगातार भक्तों की भीड़ उमड़ती रही। आकर्षक पंडाल, धार्मिक वातावरण और सुव्यवस्थित आयोजन ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। विजयादशमी पर प्रतिमा विसर्जन के साथ उत्सव संपन्न हुआ, लेकिन भक्तों के मन में मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और अगले वर्ष उनके आगमन की प्रतीक्षा बनी रही।









