चाईबासा, 25 मार्च : कोल्हान क्षेत्र में आदिवासी अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा को लेकर एक बड़ा जनअभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया है। बुधवार को मंगलाहाट स्थित मानकी-मुंडा संघ कोल्हान पोडाहाट के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित बैठक में कोल्हान आदिवासी एकता मंच ने “आदिवासी अस्तित्व बचाव अभियान” चलाने की घोषणा की।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष गणेश पाट पिंगुवा ने की। इस दौरान 25 मार्च 1820 को शहीद पार्क में हुई ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद मंच के सदस्यों और मानकी-मुंडाओं ने अभियान की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
गांव-गांव में चलेंगी बैठकें
बैठक में तय किया गया कि विभिन्न संगठनों के सहयोग से गांव-गांव जाकर आदिवासी समाज को जागरूक किया जाएगा। अभियान के माध्यम से लोगों को उनके हक, अधिकार और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए संगठित किया जाएगा।
अस्तित्व पर खतरे को लेकर चिंता
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज पर कई तरह के “अतिक्रमण” और “दबाव” बढ़ रहे हैं, जिससे उनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। विशेष रूप से जमीन और अधिकारों के मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा गया कि बाहरी लोगों द्वारा आदिवासी भूमि पर कब्जे की घटनाएं बढ़ रही हैं।
सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ समुदायों द्वारा खुद को आदिवासी घोषित करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
कानूनों के बावजूद हो रहा उल्लंघन
बैठक में यह भी कहा गया कि आदिवासियों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और सरकार द्वारा कई नियम बनाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं हो रहा है। इसके कारण कई क्षेत्रों में आदिवासियों की जनसंख्या घट रही है, जबकि बाहरी लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।
एकजुटता पर जोर
मंच के पदाधिकारियों ने आह्वान किया कि आदिवासी समाज को अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा, चाहे इसके लिए सरकार, प्रशासन या जनप्रतिनिधियों से भी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।
बैठक में मंच के अध्यक्ष देवेन्द्र नाथ चंपिया, कार्यकारी अध्यक्ष सुरेश सोय, सचिव वीर सिंह बिरूली, कोषाध्यक्ष करम सिंह मुंडा, जिला अध्यक्ष रमेश बालमुचू समेत कई पदाधिकारी, समाज के प्रतिनिधि और मानकी-मुंडा मौजूद रहे।








