चाईबासा अवैध हथियार मामला में व्यवहार न्यायालय से एक अहम और सख्त फैसला सामने आया है। अवैध हथियार रखने और प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन से जुड़े मामले में कराईकेला थाना कांड संख्या 06/2022 के आरोपी को अदालत ने दोषी करार देते हुए कुल 17 वर्ष तक की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले को पुलिस और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था के लिए एक मजबूत संदेश बताया है।

व्यवहार न्यायालय से आया बड़ा फैसला
यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश–प्रथम, चक्रधरपुर की अदालत ने सुनाया। अदालत ने आरोपी मुर्गी बोदरा उर्फ विष्णनाथ बोदरा उर्फ दोड़े को आर्म्स एक्ट और सीएलए एक्ट की विभिन्न धाराओं में दोषी पाया। आरोपी पश्चिमी सिंहभूम जिले के कराईकेला थाना क्षेत्र का निवासी है।
यह चाईबासा अवैध हथियार मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था, जिसमें पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों की गहन जांच के बाद अदालत ने यह निर्णय सुनाया।
क्या है पूरा मामला?
मामला 23 मार्च 2022 का है। कराईकेला थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध व्यक्ति नकटी बाजार के पास अवैध हथियार के साथ घूम रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया।
जैसे ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, संदिग्ध व्यक्ति पुलिस को देखकर भागने लगा। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घेराबंदी की और उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
तलाशी में बरामद हुआ अवैध हथियार
विधिवत तलाशी के दौरान आरोपी के पास से एक देशी पिस्टल बरामद की गई। पिस्टल की मैगजीन में पांच जिंदा गोलियां भी मौजूद थीं। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मुर्गी बोदरा उर्फ विष्णनाथ बोदरा उर्फ दोड़े, निवासी बुड़न बोदरा, सागो-सोसेंगा, थाना कराईकेला, जिला पश्चिमी सिंहभूम बताया।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यहीं से चाईबासा अवैध हथियार मामला की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।
अनुसंधान और चार्जशीट
अनुसंधान के दौरान कराईकेला थाना पुलिस ने सभी साक्ष्यों को वैज्ञानिक और विधिसम्मत तरीके से संकलित किया। इसके बाद न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल की गई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों, बरामद हथियार और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की संलिप्तता को साबित किया।
किन धाराओं में कितनी सजा?
अदालत ने आरोपी को निम्नलिखित धाराओं में सजा सुनाई—
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आर्म्स एक्ट धारा 25(1-बी)(ए):
4 वर्ष का सश्रम कारावास + ₹5,000 जुर्माना -
आर्म्स एक्ट धारा 25(6):
10 वर्ष का सश्रम कारावास + ₹5,000 जुर्माना -
सीएलए एक्ट धारा 17(2):
3 वर्ष का सश्रम कारावास + ₹5,000 जुर्माना
इस प्रकार अलग-अलग धाराओं में कुल मिलाकर आरोपी को 17 वर्ष तक की सजा सुनाई गई।
पुलिस और प्रशासन का बयान
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह फैसला अवैध हथियार और उग्रवादी गतिविधियों के खिलाफ एक कड़ा संदेश है। प्रशासन ने साफ किया है कि ऐसे मामलों में आगे भी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
निष्कर्ष
चाईबासा अवैध हथियार मामला में आया यह फैसला कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अवैध हथियार रखने और उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि कानून से बच पाना अब आसान नहीं होगा।







