चाईबासा मागे पर्व हत्या कांड: जश्न बना मातम, दोस्तों ने युवक की कर दी बेरहमी से हत्या

चाईबासा मागे पर्व हत्या कांड

चाईबासा मागे पर्व हत्या कांड ने पूरे कोल्हान क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। चाईबासा के पश्चिम सिंहभूम जिले में पारंपरिक उत्सव की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब एक युवक की उसके ही दोस्तों ने हत्या कर दी। वारदात के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए शव तालाब में फेंक दिया गया।

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मागे पर्व मनाने निकले थे तीनों दोस्त

घटना पश्चिम सिंहभूम जिले के हाटगम्हरिया थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान भुड़ियांसाई निवासी बैशाखु खलवा के रूप में हुई है।

14 फरवरी की रात बैशाखु अपने दो दोस्तों — पराय बोदरा और राम गागराई — के साथ पारंपरिक आदिवासी पर्व मागे पर्व मनाने निकला था। तीनों ने साथ बैठकर हड़िया पी और जश्न मनाया।

नशे में शुरू हुआ विवाद

उत्सव के बाद जब तीनों कालीमाटी गांव की ओर जा रहे थे, तभी आपसी कहासुनी शुरू हो गई। पुलिस जांच में सामने आया कि नशे की हालत में बैशाखु ने अपने दोस्त पराय बोदरा को थप्पड़ मार दिया था।

यही मामूली विवाद चाईबासा मागे पर्व हत्या कांड की वजह बन गया।

थप्पड़ का बदला हत्या से

थप्पड़ से नाराज़ होकर दोनों दोस्तों ने मिलकर बैशाखु की पिटाई शुरू कर दी। मामला इतना बढ़ गया कि उन्होंने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

हत्या के बाद आरोपी घबरा गए और सबूत मिटाने की साजिश रच डाली।

तालाब में फेंका शव

दोनों आरोपियों ने शव को पसमसाई गांव स्थित ‘जोड़ा तालाब’ में फेंक दिया। 15 फरवरी को जब तालाब से अज्ञात शव बरामद हुआ, तब इलाके में सनसनी फैल गई।

शव की पहचान होने के बाद पुलिस ने चाईबासा मागे पर्व हत्या कांड की जांच तेज कर दी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

झारखंड पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से जांच करते हुए दोनों आरोपियों तक पहुंच बनाई।

पुलिस एक्शन:

  • गिरफ्तारी: पराय बोदरा (32)

  • गिरफ्तारी: राम गागराई (30)

  • कबूलनामा: दोनों ने जुर्म स्वीकार किया

  • रिकवरी: घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

दोस्ती, नशा और हिंसा

चाईबासा मागे पर्व हत्या कांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक चेतावनी भी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में:

  • पर्व के दौरान अत्यधिक नशा

  • छोटी बात पर हिंसा

  • सामुदायिक नियंत्रण की कमी

ऐसी घटनाओं को जन्म दे रही है।

सामाजिक प्रभाव

मागे पर्व जैसे पारंपरिक उत्सव भाईचारे और सामुदायिक एकता के प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन इस घटना ने उत्सव की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है:

  • पर्वों में नशा नियंत्रण

  • ग्राम सुरक्षा समिति सक्रिय हो

  • युवाओं के लिए जागरूकता अभियान

निष्कर्ष

चाईबासा मागे पर्व हत्या कांड ने यह साबित कर दिया कि नशा और क्षणिक गुस्सा किस तरह जानलेवा बन सकता है। एक मामूली थप्पड़ ने दोस्ती को हत्या में बदल दिया।

पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और उम्मीद है कि दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।

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