Chaibasa (चाईबासा) : पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड स्थित नीमडीह गांव में जंगली हाथियों के लगातार उत्पात से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। शनिवार को ग्रामीणों ने वन विभाग की कथित लापरवाही के विरोध में पुतला दहन कर जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से हाथी गांव में घूम रहे हैं और घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे हर पल जान-माल का खतरा बना हुआ है।
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हाथियों के भय से दहशत में ग्रामीण :
स्थानीय लोगों के अनुसार, हाथी रात के समय गांव में प्रवेश कर घरों की दीवारें तोड़ रहे हैं और अनाज सहित घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची।
वन विभाग पर गंभीर आरोप :
प्रदर्शन के दौरान आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष जॉन मिरन मुंडा ने वन विभाग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हाथी स्वभाव से शांत प्राणी है, लेकिन जंगलों के विनाश ने उसे आक्रामक बना दिया है। बड़े औद्योगिक घरानों के लिए जंगल और पहाड़ों की अंधाधुंध खुदाई, अवैध खनन और पेड़ों की कटाई के कारण हाथियों का प्राकृतिक आवास समाप्त हो रहा है।
खनन और वनों की कटाई को बताया मुख्य कारण :
जॉन मिरन मुंडा ने कहा कि टाटा और रूंगटा जैसी कंपनियों के लिए किए जा रहे खनन कार्यों ने जंगलों को उजाड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों पर रोक लगाने में वन विभाग पूरी तरह असफल रहा है, जिसका खामियाजा अब ग्रामीणों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
22 मौतों के लिए वन विभाग को ठहराया जिम्मेदार :
उन्होंने कहा कि यदि वन विभाग समय रहते सतर्कता बरतता और ठोस कदम उठाता, तो हाथी हमलों में अब तक हुई 22 मौतों को रोका जा सकता था। उन्होंने सवाल उठाया कि संकट की इस घड़ी में वन कर्मी आखिर किस जिम्मेदारी के तहत वेतन उठा रहे हैं।
चक्का जाम की चेतावनी :
ग्रामीणों और पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि हाथियों को जल्द सुरक्षित जंगल क्षेत्रों में नहीं पहुंचाया गया, तो पूरे जिले में चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण अपने जीवन की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग :
आदिवासी किसान मजदूर पार्टी ने राज्य सरकार से मुआवजा नीति में बदलाव की मांग की है। पार्टी का कहना है कि ओडिशा में हाथी हमले में मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है, जबकि झारखंड में यह राशि मात्र 4 लाख रुपये है। पार्टी ने मांग की कि मृतक परिवार को 1 करोड़ रुपये और क्षतिग्रस्त घरों के लिए 10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।








