Chaibasa (चाईबासा): गुरूद्वारा नानक दरबार चाईबासा में आज श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के उपलक्ष्य में श्रद्धा और भक्ति से परिपूर्ण विशाल गुरमत समागम का आयोजन किया गया। विश्वभर में आज के दिन जहां-जहां सिख संगत मौजूद है, वहाँ नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को स्मरण किया जा रहा है। इसी क्रम में चाईबासा में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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कार्यक्रम में श्री गुरु सिंह सभा चाईबासा के अध्यक्ष गुरमुख सिंह खोखर ने शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी एवं तख्त श्री हरमंदर साहिब, पटना साहिब के महासचिव इंदर जीत सिंह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी कीर्तन जत्थों और कथा वाचकों को चाईबासा भेजकर SGPC ने स्थानीय संगत को शहीदी वर्ष की भावना से जोड़ने का कार्य किया है।

गुरु तेग बहादुर जी की शहादत का इतिहास याद किया गया
कार्यक्रम में बताया गया कि गुरु तेग बहादुर जी ने तात्कालिक मुगल सम्राट के अत्याचारों और कश्मीरी पंडितों पर हो रहे ज़बरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज़ उठाई थी। हिन्दू धर्म और मानवीय अधिकारों की रक्षा के लिए उन्होंने 24 नवंबर 1675 को दिल्ली के चांदनी चौक में अपना शीश बलिदान कर दिया।
जहाँ उनका शीश धड़ से अलग किया गया था, वहाँ आज भव्य गुरूद्वारा शीशगंज साहिब स्थित है।
जहाँ उनका पार्थिव शरीर (धड़) का अंतिम संस्कार हुआ, वहाँ गुरूद्वारा रकाबगंज साहिब, और जहाँ उनके शीश का संस्कार किया गया, वहाँ गुरूद्वारा सीसगंज, आनंदपुर साहिब स्थापित है।
गुरु तेग बहादुर जी को “हिन्द की चादर” के नाम से जाना जाता है क्योंकि उन्होंने जबरन धर्म परिवर्तन से लोगों की रक्षा कर पूरे समाज के लिए ढाल का कार्य किया।

कीर्तन जत्थों और कथा वाचकों ने बिखेरी भक्ति की छटा
समागम सप्ताह के तहत 17 नवंबर से 25 नवंबर तक जमशेदपुर और आसपास के गुरूद्वारों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इसी श्रृंखला में चाईबासा पहुंचे पंजाब के जालंधर से आई नवतेज़ कौर और पटना साहिब से आए कविइंदर सिंह के कीर्तन जत्थों ने मधुर गुरबाणी कीर्तन से संगत को रसविभोर कर दिया।
तख्त श्री हरमंदर साहिब, पटना साहिब के कथा वाचक हरविंदर सिंह ने गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत वर्ष की ऐतिहासिक जानकारी संगत के समक्ष प्रस्तुत की और सभी को अपने से जोड़े रखा।

सिख धर्म सेवा और शहादत की कौम है: वक्ता
कार्यक्रम में सेंट्रल गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी जमशेदपुर के अध्यक्ष भगवान सिंह ने कहा कि सिख धर्म सदैव धर्म, मानवता और सेवा की रक्षा के लिए खड़ा रहा है।
वहीं झारखंड गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि सिखों का इतिहास बताता है कि हमारे गुरुओं ने हमें जुझारू और सेवा-परायण बनाया है।
महासचिव अमर जीत सिंह ने चाईबासा की साध-संगत को इस आयोजन के सफल संचालन के लिए साधुवाद दिया।
कार्यक्रम का समापन आभार प्रकट करने के साथ
अंत में श्री गुरु सिंह सभा चाईबासा के अध्यक्ष गुरुमुख सिंह खोखर ने सभी संगत, समितियों, कीर्तन जत्थों और प्रबंधकों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

