Ranchi (रांची) : झारखंड के कई प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है, जिससे राज्य में स्वास्थ्य संकट की आशंका गहराने लगी है। राजधानी रांची के साथ-साथ जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग और देवघर में हवा का स्तर मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो झारखंड के शहरी क्षेत्रों की स्थिति दिल्ली जैसी गंभीर हो सकती है।
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पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में बढ़ते वाहनों की संख्या, कोयला आधारित उद्योग, खनन गतिविधियां, निर्माण स्थलों से उड़ती धूल, खुले में कचरा जलाना और हरित क्षेत्रों में कमी वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। सर्दियों में हवा की गति कम होने से प्रदूषक कण वातावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल के दिनों में सांस लेने में तकलीफ, खांसी, आंखों में जलन और अस्थमा से जुड़े मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ रहा है।
वहीं झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों, निर्माण स्थलों और वाहनों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसके लिए नागरिकों का सहयोग भी जरूरी है।
📊 झारखंड : प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता (AQI – हालिया स्थिति)
शहर AQI स्तर (लगभग) श्रेणी स्वास्थ्य प्रभाव
रांची 150–180 मध्यम से खराब सांस व एलर्जी के मरीजों को दिक्कत
जमशेदपुर 160–190 खराब अस्थमा, आंखों में जलन
धनबाद 180–220 खराब से बहुत खराब श्वसन रोगों का खतरा
बोकारो 170–200 खराब हृदय व फेफड़ों पर असर
हजारीबाग 140–170 मध्यम से खराब बच्चों-बुजुर्गों को सावधानी
देवघर 130–160 मध्यम लंबे समय में नुकसान
नोट: AQI स्तर मौसम, औद्योगिक गतिविधि व ट्रैफिक के अनुसार घट–बढ़ सकता है।
प्रशासन की ओर से निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, कचरा जलाने पर रोक, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और वृक्षारोपण अभियान तेज करने की बात कही गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि अभी समन्वित प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में झारखंड को गंभीर वायु प्रदूषण संकट का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों और प्रशासन की चेतावनी
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में इन्वर्ज़न लेयर बनने से प्रदूषक ऊपर नहीं उठ पाते, जिससे स्थिति बिगड़ती है। जिला प्रशासन ने निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, खुले में कचरा जलाने पर रोक, उद्योगों में उत्सर्जन मानकों की सख्ती और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों, बुजुर्गों और दमा रोगियों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने, मास्क के उपयोग और पर्याप्त जल सेवन की सलाह दी है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रीन कवर बढ़ाना, ई-वाहनों को प्रोत्साहन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, और जन-जागरूकता अभियान जरूरी हैं। समय पर ठोस कदम नहीं उठे तो झारखंड के शहरों में प्रदूषण दीर्घकालिक संकट का रूप ले सकता है।








