अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर अपने अधिकारों का निर्वहन करने का संदेश दिया जाता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है – राजाराम गुप्ता

Chaibasa :- 10 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर सारे मानव समुदाय को शांतिपूर्वक अपने अधिकारों का निर्वहन करने का संदेश दिया जाता है. लेकिन वर्तमान समय में आजादी के बाद भी लोग अपने अधिकारों को लेकर परेशान हैं. उक्त बातें अधिवक्ता सह सामाजिक कार्यकर्ता राजाराम गुप्ता ने कही.

उन्होंने कहा कि मानव को उसका अधिकार जन्म से ही मिल जाते हैं. पहला अधिकार सुरक्षित, शांतिपूर्ण, सम्मानित जीवन जीने का है. जिसका आज लोप होता जा रहा है. धनबल, बाहुबल के साथ भ्रष्टाचार चरम पर है, कुछ सरकारी कार्यालयों में अपने कार्यों को करवाने में मानसिक प्रताड़ना का सामना भी करना पड़ता है. जो उनका अधिकार है उन्हें नहीं मिल पाता. इन्हीं सब कारणों से आम आदमी को अपने अधिकारों से वंचित है. श्री गुप्ता ने कहा कि क्षेत्र विशेष में देखा जाए तो जमीन विवाद हुआ बीमारी के नाम पर डायन बिसाही का आरोप लगाकर निर्दोष महिलाओं की निर्मम हत्या कर दी जाती है. इसे रोकने के लिए विशेष रूप से जन जागरूकता कार्यक्रम में तेजी लाने की आवश्यकता है. वर्तमान में विज्ञान इतनी तरक्की कर चुका है. इसके बावजूद भी हम अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच (एशिया) के ब्रेड ऐडम्स का भी कहना है कि भारत देश को मानव अधिकार के क्षेत्र में और अधिक कार्य करने तथा जागरूकता लाने की आवश्यकता है लंदन स्थित हुमन राइट्स वॉच पूरी दुनिया में मानव अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाली प्रमुख संरक्षण संस्था है जो मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की पड़ताल करती है. अगर वर्तमान समय में देखा जाए तो भारत देश में कई क्षेत्रों में जानबूझकर सुनियोजित ढंग से लोगों द्वारा लोगों का ही मानव अधिकार का हनन किया जाता है. जिसमें प्रमुख रूप से घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न तथा आदि मामले शामिल है. विशेषकर झारखंड राज्य में जमीन विवाद व अन्य मामलों पर बड़ी घटनाएं आए दिन होती रहती है.

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