Chaibasa (चाईबासा) : नाबालिग से यौन शोषण का एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहां शादी का झांसा देकर 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ लगातार यौन शोषण करने और उसे गर्भवती करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
नाबालिग से यौन शोषण का मामला, आरोपी गिरफ्तार, पोक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, गुवा थाना क्षेत्र के लिपुंगा गांव निवासी मधुसूदन अंगरिया की 15 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के बड़ानंदा गांव निवासी 23 वर्षीय माना अंगरिया पिछले लगभग दो वर्षों से शादी का झांसा देकर यौन शोषण करता रहा।
इस दौरान नाबालिग से यौन शोषण का यह सिलसिला इतना गंभीर हो गया कि पीड़िता गर्भवती हो गई।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद खुला मामला
नाबालिग के गर्भवती होने के बाद परिजनों द्वारा उसे गुवा सेल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं बाल अधिकार मंच से जुड़ी महिलाओं को जब इस मामले की जानकारी मिली, तो वे अस्पताल पहुंचीं और पीड़िता व उसके परिजनों से पूरी जानकारी ली।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
बाल अधिकार मंच के सहयोग से नाबालिग के माता-पिता को गुवा थाना लाया गया, जहां आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
एफआईआर दर्ज होने के बाद गुवा थाना प्रभारी नीतीश कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने जांच शुरू की।
रविवार को गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के बड़ानंदा गांव में छापेमारी कर आरोपी माना अंगरिया को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में अपराध स्वीकार
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी ने नाबालिग से यौन शोषण करने का अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में चाईबासा जेल भेज दिया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
कानूनी दृष्टि से गंभीर अपराध
विशेषज्ञों के अनुसार, नाबालिग से यौन शोषण के मामलों में POCSO एक्ट के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है। शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाना और नाबालिग को गर्भवती करना कानूनन जघन्य अपराध माना जाता है।
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National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR)
समाज के लिए चेतावनी
यह मामला समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बेहद जरूरी है। परिजनों को बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देने और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस या बाल संरक्षण संस्थाओं से संपर्क करना चाहिए।
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