हमारी संस्कृति में झलकती सरलता एवं सहज स्वभाव ही हमारी पहचान : मंत्री

पिल्लई हॉल में धूमधाम से मना आदिवासी उराव समाज संघ का 77वां स्थापना दिवस समारो

मंत्री ने उरांव समाज के लिए सामुदायिक भवन देने की घोषणा की



Chaibasa : उरांव समुदाय की ओर से रविवार को आदिवासी उराव समाज संघ का 77वां स्थापना दिवस समारोह स्थानीय पिल्लई टाउन हॉल चाईबासा में काफी धूमधाम के साथ मनाया गया. इस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा उपस्थित रहे. साथ ही विशिष्ट अतिथि के रूप में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राहुल देव बड़ाइक, वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी कोल्हान शंकर भगत, राजकुमार ओझा, इम्तियाज खां, छोटेलाल तामसोय, सुभाष बनर्जी आदि उपस्थित होकर कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित के साथ किया गया.

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मौके पर उरांव समाज संघ के संस्थापककर्ताओं के तस्वीर पर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया. इसके बाद समाज के युवक युवतियों के द्वारा मनमोहक स्वागत गान प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम में अध्यक्ष संचू तिर्की ने अतिथियों को तथा आगंतुको को अपने स्वागत भाषण में संबोधन करते हुए स्थापना दिवस के बारे में जानकारी दी. मौके पर संस्थापक मंडली के परिवार वालों को भी सम्मानित किया गया. वहीं विभिन्न कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले समाज के लोगों को भी सम्मानित किया गया. मुख्य अतिथि समेत अन्य अतिथियों के हाथों सभी को सम्मानित किया गया.

मौके पर मंत्री दीपक बिरुवा ने कहा कि हम आदिवासियों का स्वाभाव सरल एवं सहृदय होते हैं. प्रकृति एवं संस्कृति से हमारा गहरा नाता है, हमारी संस्कृति में झलकती सरलता एवं सहज स्वभाव ही हमारी पहचान है. आज भी हम अपने पूर्वजों के बताए मार्गो पर चलकर विकसित होते जा रहे हैं. अपनी संस्कृति को अक्षुण बनाए रखे हैं, और यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है. समाज की एकजुटता एवं सहयोग की भावना को देखकर काफी प्रसन्नता हो रही है.

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आज भी काफी पीछे है. इस पर हमें काफी मेहनत करते हुए समाज के मुख्य धाराओं से जोड़ना होगा. इस मौके पर उन्होंने उरांव समाज के लिए सामुदायिक भवन देने की घोषणा की. कार्यक्रम में समाज के पुरुष महिलाओं तथा बच्चे उपस्थित थे. इस समारोह में संचू तिर्की, सहदेव किस्पोट्टा, लालू कुजूर, अनिल लकड़ा, अनुप टोप्पो, राकेश उरांव, कर्मा टोप्पो, जगन्नाथ कुजूर, सहित काफी संख्या में उरांव समुदाय के महिला पुरूष उपस्थित थे.

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